नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव के बीच शिक्षा और करियर को लेकर नई बहस शुरू हो गई है. पूर्व यूजीसी चेयरमैन एम. जगदीश कुमार ने कहा है कि आने वाले समय में पारंपरिक डिग्री की उपयोगिता तेजी से घट सकती है और सिर्फ डिग्री पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा.
उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया कि तकनीक के तेजी से बदलते दौर में अब सीखने का तरीका भी बदलना जरूरी हो गया है. पहले जहां बदलाव आने में कई साल लगते थे, अब वही बदलाव बहुत कम समय में हो जाते हैं. ऐसे में जो ज्ञान आज पढ़ाया जा रहा है, वह अगले ही साल पुराना पड़ सकता है.
एम. जगदीश कुमार के अनुसार छात्रों के मन में यह चिंता बढ़ रही है कि उनकी डिग्री भविष्य में बेकार न हो जाए. खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से विकास ने इस डर को और बढ़ा दिया है. उनका कहना है कि अब नौकरी पाने के लिए केवल डिग्री नहीं बल्कि व्यावहारिक कौशल और नई तकनीकों की समझ भी जरूरी हो गई है.
उन्होंने स्पष्ट किया कि डिग्री पूरी तरह खत्म नहीं होगी, लेकिन उसकी अहमियत कम हो सकती है. आज के समय में कंपनियां ऐसे लोगों को ज्यादा महत्व देती हैं, जिनके पास नई स्किल्स हैं और जो लगातार खुद को अपडेट करते रहते हैं.
इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को तैयार किया गया है. इस नीति का मुख्य उद्देश्य छात्रों को लाइफ लॉन्ग लर्नर बनाना है, ताकि वे बदलते समय के साथ खुद को ढाल सकें.
यूजीसी ने भी छात्रों के लिए कई नई सुविधाएं शुरू की हैं. स्वयं और स्वयं प्लस जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए छात्र अलग-अलग विषयों में नए कोर्स कर सकते हैं. इसके अलावा कई विश्वविद्यालयों को ऑनलाइन डिग्री देने की अनुमति दी गई है, जिससे पढ़ाई और भी लचीली हो गई है.
एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट जैसे सिस्टम से छात्र अलग-अलग कोर्स करके क्रेडिट जमा कर सकते हैं और जरूरत के अनुसार अपनी पढ़ाई को आगे बढ़ा सकते हैं. यह व्यवस्था छात्रों को लगातार सीखते रहने और नई स्किल्स जोड़ने में मदद करती है.
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में वही लोग सफल होंगे, जो लगातार सीखते रहेंगे और नई तकनीकों को अपनाएंगे. ऐसे में छात्रों के लिए जरूरी है कि वे केवल डिग्री तक सीमित न रहें, बल्कि अपनी स्किल्स को समय-समय पर अपडेट करते रहें.