ऑस्ट्रेलिया दुनियाभर के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा का पसंदीदा गंतव्य बना हुआ है. यहां पढ़ाई पूरी करने के बाद छात्रों को ‘टेंपरेरी ग्रेजुएट वीजा’ (Subclass 485) के जरिए देश में रुककर काम करने का मौका मिलता है. यह वीजा छात्रों को उनके करियर की शुरुआत करने का सुनहरा अवसर देता है. भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच हुए AI-ECTA समझौते के बाद भारतीय छात्रों के लिए यह अवधि और भी बढ़ा दी गई है.
इस समझौते के तहत भारतीय छात्र अब अपनी डिग्री के प्रकार के अनुसार दो से चार साल तक ऑस्ट्रेलिया में रह सकते हैं और जॉब कर सकते हैं.
‘टेंपरेरी ग्रेजुएट वीजा’ के तहत छात्रों को दो से तीन साल तक देश में रुककर जॉब करने की अनुमति मिलती है. बैचलर्स डिग्री (ऑनर्स) वाले छात्रों को 2 साल, मास्टर्स वालों को 2 साल, और रिसर्च या डॉक्टोरल डिग्री धारकों को 3 साल तक रुकने की अनुमति दी जाती है. हालांकि भारतीय छात्रों को AI-ECTA समझौते के चलते अतिरिक्त अवधि मिलती है.
AI-ECTA समझौते के अनुसार, भारत के छात्र अब STEM (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, मैथ्स) विषयों में बैचलर्स करने पर 3 साल तक, मास्टर्स करने पर 3 साल तक और डॉक्टोरल डिग्री करने पर 4 साल तक ऑस्ट्रेलिया में रह सकते हैं. वहीं ग्रेजुएट डिप्लोमा धारक 2 साल तक काम कर सकते हैं.
‘टेंपरेरी ग्रेजुएट वीजा’ की एप्लिकेशन फीस 2300 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर यानी लगभग 1.32 लाख रुपये है. परिवार के सदस्यों के लिए अतिरिक्त शुल्क देना होता है. हेल्थ एग्जाम, पुलिस सर्टिफिकेट और बायोमेट्रिक्स के लिए भी अलग से भुगतान करना पड़ता है.
यह वीजा एक्सटेंड नहीं किया जा सकता. हालांकि, अगर छात्र इस वीजा के दौरान किसी कंपनी में काम कर रहे हैं और वह कंपनी उन्हें स्पॉन्सर करने को तैयार हो, तो नया वर्क वीजा प्राप्त किया जा सकता है.
वीजा होल्डर ऑस्ट्रेलिया में कभी भी आ-जा सकता है, लेकिन विदेश में बिताया गया समय भी वीजा अवधि में गिना जाएगा. यानी अगर दो साल का वीजा है और छात्र एक साल बाहर रहा, तो वीजा फिर भी सिर्फ दो साल में खत्म होगा.