बीते सप्ताह भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों ने भारी उठापटक और हाहाकार का सामना किया. बिकवाली के दबाव में बीएसई का सेंसेक्स 2.33 फीसदी और एनएसई का निफ्टी 1.87 फीसदी लुढ़क गया. कुछ ही दिनों में सेंसेक्स की टॉप-10 में से 7 बड़ी कंपनियों का 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का मार्केट कैप साफ हो गया.
अब निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि सोमवार से शुरू हो रहे नए कारोबारी सप्ताह में बाजार किस करवट बैठेगा. मार्केट एक्सपर्ट्स और एनालिस्ट्स के मुताबिक, अगले हफ्ते दलाल स्ट्रीट का मूड मुख्य रूप से तीन बड़े फैक्टर्स पर निर्भर करेगा.
बाजार के जानकारों का मानना है कि ग्लोबल जियो-पॉलिटिकल स्थिति बाजार की दिशा तय करेगी. खास तौर पर मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव और दुनिया भर में तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम होर्मुज स्ट्रेट को लेकर आने वाले हर अपडेट पर निवेशकों की नजर रहेगी. एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर के मुताबिक, इस समुद्री रूट पर किसी भी तरह का व्यवधान या तनाव शेयर बाजार में भारी अस्थिरता ला सकता है, जिससे मुनाफावसूली और तेज हो सकती है.
दूसरा सबसे अहम फैक्टर है कच्चे तेल की कीमतें. अंतरराष्ट्रीय बाजार में फिलहाल ब्रेंट क्रूड ऑयल 105 डॉलर प्रति बैरल के खतरनाक स्तर को पार कर गया है. भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल आयात करता है. महंगे क्रूड का सीधा असर हमारी अर्थव्यवस्था और बाजार पर पड़ता है. अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत से जुड़ी खबरों पर बाजार रिएक्ट करेगा. अगर क्रूड ऑयल के दाम गिरते हैं या स्थिर होते हैं, तो बाजार को बड़ी राहत मिलेगी और शानदार रिकवरी देखने को मिल सकती है.
ग्लोबल टेंशन के अलावा घरेलू मोर्चे पर कंपनियों के वित्तीय नतीजे बाजार की चाल तय करेंगे. इन दिनों कंपनियों के चौथी तिमाही के रिजल्ट्स आ रहे हैं. इस हफ्ते कई बड़ी कंपनियों के नतीजे आने हैं, जिसके चलते स्टॉक-स्पेसिफिक भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा.
निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए कि इस हफ्ते शेयर बाजार में केवल चार दिन ही ट्रेडिंग होगी. 1 मई को महाराष्ट्र दिवस के अवसर पर दलाल स्ट्रीट पर अवकाश घोषित है, इसलिए शुक्रवार को बाजार में कोई कामकाज नहीं होगा. इसके अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को लेकर लिए जाने वाले फैसलों पर भी विदेशी संस्थागत निवेशकों की पैनी नजर रहेगी.