30 मार्च को शेयर बाजार में लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में भयंकर बिकवाली का दबाव देखा गया. दोपहर 3 बजे तक सेंसेक्स 1,719.03 अंक (2.34%) लुढ़ककर 71,864.19 के स्तर पर आ गया. वहीं, निफ्टी 507.25 अंक (2.22%) टूटकर 22,312.35 पर पहुंच गया. पूरे बाजार में हाहाकार की स्थिति रही; केवल 714 शेयरों में मामूली बढ़त दिखी, जबकि 3,393 शेयर धड़ाम हो गए और 114 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ.
मार्च का यह महीना शेयर बाजार के लिए मार्च 2020 में आई कोविड-19 की गिरावट के बाद सबसे बुरा महीना बन गया है. इस महीने निफ्टी और सेंसेक्स दोनों में लगभग 10.5% की भारी गिरावट दर्ज की गई है. आइए समझते हैं इस ऐतिहासिक गिरावट के पीछे के 4 सबसे बड़े कारण.
बाजार के क्रैश होने का सबसे बड़ा विलेन कच्चा तेल है. ब्रेंट क्रूड 3% उछलकर 115.98 डॉलर प्रति बैरल के खतरनाक स्तर को पार कर गया है. केवल मार्च महीने में ही तेल की कीमतों में 60% की रिकॉर्ड वृद्धि हुई है, जो 1990 के इराक-कुवैत खाड़ी युद्ध के बाद आई तेजी से भी ज्यादा भयानक है. महंगे तेल से भारत में महंगाई और राजकोषीय घाटा बढ़ने का सीधा खतरा पैदा हो गया है.
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहा युद्ध अब पांचवें हफ्ते में पहुंच गया है. यमन के हूती विद्रोहियों ने भी इजरायल पर हमले तेज कर दिए हैं, जिससे लाल सागर का अहम व्यापारिक मार्ग ब्लॉक होने की कगार पर है. ईरान ने अमेरिकी सेना को ताबूत में लौटने की सीधी चेतावनी दी है. युद्ध के इस विकराल रूप ने वैश्विक निवेशकों को डरा दिया है, जिससे उनकी जोखिम लेने की क्षमता पूरी तरह खत्म हो गई है.
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPIs) भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं. NSDL के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी निवेशकों ने इस महीने के हर कारोबारी दिन बिकवाली की है. 27 मार्च तक उनका कुल बिकवाली का आंकड़ा रिकॉर्ड 1,18,093 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. शुक्रवार को ही उन्होंने 4,367 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जिसने बाजार के सेंटिमेंट को बुरी तरह तोड़ दिया.
बाजार को नीचे खींचने में बैंकिंग सेक्टर का भी बड़ा हाथ रहा. हैवीवेट फाइनेंशियल और बैंक शेयर 2.5% तक गिर गए. इसकी मुख्य वजह रिजर्व बैंक का वह सख्त निर्देश है, जिसमें बैंकों को विदेशी मुद्रा बाजार में अपनी नेट ओपन रुपया पोजीशन को रोजाना 100 मिलियन डॉलर तक सीमित रखने को कहा गया है. इसके चलते बैंकों को अपनी अरबों डॉलर की आर्बिट्रेज पोजीशन जल्दबाजी में खत्म करनी पड़ रही है, जिससे नुकसान की आशंका बढ़ गई है.