मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में कमजोरी का माहौल देखने को मिला. वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है. इसी के चलते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में गिरावट दर्ज की गई. शुरुआती कारोबार में बिकवाली का दबाव साफ नजर आया, खासकर बैंकिंग शेयरों में. विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी ने भी बाजार की दिशा को प्रभावित किया है, जिससे निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ता दिख रहा है.
कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल बाजार के लिए सबसे बड़ा झटका साबित हुआ. ब्रेंट क्रूड 115 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जो इस महीने भारी बढ़त दिखाता है. मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और सप्लाई बाधित होने की आशंका ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है. तेल महंगा होने से भारत जैसे आयातक देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ता है, जिससे बाजार में नकारात्मक माहौल बनता है.
बैंकिंग सेक्टर में भारी गिरावट देखी गई, जिससे बाजार पर अतिरिक्त दबाव पड़ा. बैंक निफ्टी में 2 प्रतिशत से ज्यादा की कमजोरी दर्ज की गई. इसके पीछे रिजर्व बैंक द्वारा विदेशी मुद्रा पोजीशन पर सख्ती को अहम कारण माना जा रहा है. इस फैसले के चलते बैंकों को अपने पुराने सौदे समेटने पड़ सकते हैं, जिससे शेयरों में बिकवाली बढ़ी है और निवेशकों का भरोसा डगमगाया है.
रुपये में गिरावट को रोकने के लिए केंद्रीय बैंक ने बैंकों के विदेशी मुद्रा जोखिम पर सीमा तय की है. इससे बाजार में डॉलर की बिक्री बढ़ने की संभावना है. हालांकि, इससे पहले बनाए गए आर्बिट्राज सौदों को खत्म करना पड़ सकता है, जिससे अस्थिरता बढ़ी है. अनुमान है कि ऐसे सौदों का आकार अरबों डॉलर में है, जो बाजार की चाल को प्रभावित कर सकता है.
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं. मार्च महीने में अब तक भारी बिकवाली दर्ज की गई है. वैश्विक अनिश्चितता, रुपये की कमजोरी और तेल की ऊंची कीमतों ने विदेशी निवेशकों का भरोसा कम किया है. इसके अलावा खाड़ी देशों से आने वाली रेमिटेंस पर असर की आशंका भी निवेशकों को सतर्क बना रही है.
मौजूदा हालात में बाजार की दिशा वैश्विक घटनाओं और तेल कीमतों पर निर्भर करती नजर आ रही है. जब तक मध्य पूर्व में तनाव कम नहीं होता और तेल कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है. निवेशकों को फिलहाल सतर्क रणनीति अपनाने की जरूरत है और जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना चाहिए.