मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में आज का कारोबारी दिन निवेशकों के लिए बेहद निराशाजनक रहा. सुबह से ही बाजार पर बिकवाली का दबाव दिखाई दिया, जिसके चलते प्रमुख सूचकांकों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई. सेंसेक्स सैकड़ों अंक फिसल गया, जबकि निफ्टी भी महत्वपूर्ण स्तरों से नीचे आ गया. वैश्विक बाजारों में कमजोरी, खासकर अमेरिकी और दक्षिण कोरियाई बाजारों में आई गिरावट का असर घरेलू निवेशकों के भरोसे पर साफ नजर आया. दिनभर बाजार में अस्थिरता बनी रही और अधिकांश सेक्टर लाल निशान में कारोबार करते दिखे.
भारतीय बाजार में आई कमजोरी की शुरुआत विदेशी संकेतों से हुई. अमेरिका में टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयरों में हुई बिकवाली ने दुनिया भर के निवेशकों की चिंता बढ़ा दी. इसका सबसे ज्यादा असर दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार पर पड़ा, जहां प्रमुख सूचकांक कोस्पी में करीब 10 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई. हालात इतने खराब हो गए कि बाजार में कुछ समय के लिए कारोबार रोकना पड़ा. निवेशकों ने तेजी से मुनाफावसूली शुरू कर दी, जिससे एशियाई बाजारों का माहौल पूरी तरह बदल गया और इसका असर भारत तक पहुंचा.
घरेलू बाजार में आईटी सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित रहा. इंफोसिस, टीसीएस, एचसीएल टेक और विप्रो जैसे बड़े शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली. निवेशकों को आशंका है कि वैश्विक स्तर पर टेक कंपनियों के ऊंचे वैल्यूएशन पर दबाव बढ़ सकता है. इसी कारण आईटी शेयरों में बिकवाली तेज हो गई. निफ्टी आईटी इंडेक्स दिन के दौरान सबसे कमजोर सेक्टर के रूप में उभरा. बड़े निवेशकों के साथ-साथ खुदरा निवेशकों ने भी जोखिम कम करने के लिए अपने शेयर बेचने शुरू कर दिए.
दक्षिण कोरिया का बाजार पिछले कुछ समय से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और चिप सेक्टर की मजबूती के कारण लगातार ऊंचाइयों पर था. हालांकि हालिया गिरावट ने निवेशकों को झटका दिया. सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों में आई तेज कमजोरी ने पूरे बाजार का संतुलन बिगाड़ दिया. विदेशी निवेशकों ने वहां बड़े पैमाने पर शेयर बेचकर मुनाफा वसूला, जिससे बाजार पर अतिरिक्त दबाव बना. इस नकारात्मक माहौल ने एशिया के अन्य बाजारों को भी प्रभावित किया.
शेयर बाजार में आई इस तेज गिरावट का सीधा असर निवेशकों की संपत्ति पर पड़ा. बाजार पूंजीकरण में भारी कमी दर्ज की गई और अनुमान है कि निवेशकों की कुल संपत्ति में करीब 4.57 लाख करोड़ से 5 लाख करोड़ रुपये तक की गिरावट आई. विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल वैश्विक संकेतों पर नजर बनाए रखना जरूरी होगा. आने वाले दिनों में विदेशी बाजारों की चाल और निवेशकों का भरोसा तय करेगा कि बाजार में स्थिरता लौटती है या उतार-चढ़ाव जारी रहता है.