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उत्तराखंड में फायर सेफ्टी पर सीएम धामी का बड़ा एक्शन! अस्पताल, मॉल और होटलों की होगी सख्त जांच

उत्तराखंड सरकार ने राज्यभर में अस्पतालों, कोचिंग संस्थानों, होटलों, मॉल और अन्य सार्वजनिक भवनों का व्यापक फायर सेफ्टी ऑडिट कराने का फैसला किया है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सुरक्षा मानकों के पालन पर सख्त निर्देश दिए हैं.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
उत्तराखंड में फायर सेफ्टी पर सीएम धामी का बड़ा एक्शन! अस्पताल, मॉल और होटलों की होगी सख्त जांच
Courtesy: social media

उत्तराखंड में सार्वजनिक सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बड़ा कदम उठाया है. सचिवालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में उन्होंने राज्यभर के प्रमुख सार्वजनिक उपयोग वाले भवनों की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की विस्तृत जांच कराने के निर्देश दिए हैं.

अग्नि सुरक्षा पर सरकार की सख्ती

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि अस्पतालों, कोचिंग सेंटरों, बड़े शॉपिंग मॉल, होटल और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में मौजूद फायर सेफ्टी व्यवस्थाओं का गहन परीक्षण किया जाए। उन्होंने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है. किसी भी संस्थान में सुरक्षा मानकों की अनदेखी मिलने पर संबंधित जिम्मेदार पक्षों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी. सरकार चाहती है कि सभी सार्वजनिक भवन संभावित आपात स्थितियों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहें.

कमियों की पहचान और त्वरित सुधार

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को उन संस्थानों की तुरंत पहचान करने को कहा, जहां अग्नि सुरक्षा व्यवस्था निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है. उन्होंने निर्देश दिया कि ऐसी जगहों पर बिना देरी के आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएं. विशेष रूप से अग्निशमन उपकरणों की कार्यक्षमता, आपातकालीन निकास मार्गों की उपलब्धता, विद्युत सुरक्षा प्रणाली और आपदा के समय लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की तैयारियों का मूल्यांकन करने पर जोर दिया गया.

समयबद्ध तरीके से पूरा होगा ऑडिट

मुख्यमंत्री धामी ने फायर सर्विस विभाग, जिला प्रशासन और अन्य संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के निर्देश भी दिए. उनका कहना है कि संयुक्त प्रयासों से ही सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाया जा सकता है. अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया कि पूरा ऑडिट निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा हो और उसकी रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कदम तुरंत लागू किए जाएं, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की दुर्घटना की संभावना को कम किया जा सके.