500 अंक फिसलने के बाद कैसे संभला बाजार? Sensex-Nifty की जोरदार वापसी के पीछे ये 3 बड़े कारण

गुरुवार को शुरुआती भारी गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजार ने जोरदार रिकवरी की. विदेशी निवेशकों को टैक्स राहत की उम्मीद इजरायल-लेबनान सीजफायर और कच्चे तेल की कीमतों में कमी आने से बाजार को बड़ा सहारा मिला.

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Kuldeep Sharma

मुंबई: शेयर बाजार का मिजाज भी मौसम की तरह पल-पल बदलता है जहां सुबह छाई मंदी की काली घटा को देख दिल बैठने लगता है तो दोपहर होते-होते तेजी की खिली धूप चेहरे पर मुस्कान ला देती है. गुरुवार को दलाल स्ट्रीट पर कुछ ऐसा ही उतार-चढ़ाव भरा माहौल देखने को मिला है.

भारतीय शेयर बाजार ने शुरुआती कारोबार में आई भारी गिरावट के बाद जबरदस्त वापसी की. निवेशकों ने सूझबूझ दिखाते हुए कम कीमतों पर शेयरों की जमकर खरीददारी की जिससे सेंसेक्स और निफ्टी अपने सुबह के बड़े नुकसान को काफी हद तक वसूल करने में कामयाब रहे.

खुलने के बाद दबाव क्षेल रहा था बाजार

कारोबार की शुरुआत में बाजार पर तगड़ा दबाव था. बीएसई सेंसेक्स 500 से ज्यादा अंक टूट गया था और एनएसई निफ्टी में भी बड़ी गिरावट देखी जा रही थी. लेकिन जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा, बाजार का सेंटिमेंट सुधरा और दोनों प्रमुख सूचकांक हरे निशान में आ गए. बाजार की इस दमदार वापसी के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण रहे.

बाजार की वापसी के तीन बड़े फैक्टर

1. पहला सबसे बड़ा कारण सरकार की ओर से विदेशी निवेशकों को मिलने वाली टैक्स राहत की खबर रही. रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार गवर्नमेंट सिक्योरिटीज में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश यानी FPI पर टैक्स खत्म करने के लिए एक अध्यादेश ला सकती है. दरअसल कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी फंड्स के लगातार बाहर जाने से भारतीय रुपया दबाव में था. ऐसे में इस टैक्स राहत की उम्मीद ने निवेशकों का भरोसा बढ़ा दिया क्योंकि इससे भारतीय बाजार में विदेशी पैसा आने का रास्ता साफ होगा.

2. वैश्विक स्तर पर सुधरते हालात मार्केट की वापसी का दूसरा बड़ा कारण रहा. इजरायल और लेबनान के बीच संघर्ष विराम लागू होने की खबरों ने मिडिल ईस्ट के तनाव को लेकर बनी चिंताओं को काफी कम कर दिया है. हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के चलते थोड़ी अनिश्चितता अब भी है फिर भी निवेशकों ने इस शांति समझौते का स्वागत किया है.

3. तीसरा बड़ा कारण रहा कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट. अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड के दाम नीचे आने से भारत को बड़ी राहत मिली है. चूंकि भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा बाहर से आयात करता है इसलिए तेल सस्ता होने से देश का आयात खर्च घटेगा रुपये को मजबूती मिलेगी और महंगाई का दबाव कम होगा. इन सकारात्मक खबरों के दम पर निवेशकों का उत्साह लौट आया और बाजार ने सुबह की अपनी पूरी गिरावट को मुनाफे में बदल दिया.