ट्रंप का एक ऐलान और शेयर मार्केट हुआ क्रैश! जानें बाजार में भारी गिरावट की 3 बड़े कारण
बुधवार को अमेरिका-ईरान तनाव के कारण कच्चे तेल में उछाल और अमेरिकी टेक शेयरों में मंदी से शेयर बाजार में हाहाकार मच गया. सेंसेक्स 1,677 अंकों से अधिक टूटा और निफ्टी भी 2400 के नीचे बंद हुआ.
मुंबई: बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली और निवेशकों ने जमकर बिकवाली की. इसके पीछे मुख्य वजहें मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेत रहे. दोपहर करीब 2 बजे तक बीएसई सेंसेक्स 1,677 अंक की भारी गिरावट के साथ 76,503 पर आ गया. वहीं एनएसई निफ्टी50 भी फिसलकर 2400 के स्तर के नीचे पहुंच गया. पिछले कुछ हफ्तों से तेल के कम दामों और विदेशी निवेशकों के भरोसे के दम पर बाजार अच्छा प्रदर्शन कर रहा था, लेकिन अचानक बदले हालातों ने सेंटिमेंट बिगाड़ दिया.
बाजार टूटने की 3 सबसे बड़ी वजहें
1. अमेरिका-ईरान तनाव से कच्चा तेल हुआ महंगा- आज की गिरावट का सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच फिर से शुरू हुआ विवाद है. अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए नए सैन्य हमलों के बाद मिडिल ईस्ट से तेल की सप्लाई रुकने का डर बढ़ गया है. इसी वजह से ब्रेंट क्रूड ऑयल यानी कच्चा तेल 2% से ज्यादा उछलकर 76 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया. भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% तेल बाहर से इम्पोर्ट करता है, इसलिए महंगा तेल भारत के लिए बड़ा झटका है. इससे देश का आयात बिल बढ़ेगा, महंगाई बढ़ सकती है, कंपनियों की लागत बढ़ेगी और उनका मुनाफा कम होगा, जिससे देश की आर्थिक रफ्तार धीमी हो सकती है.
2. अमेरिकी टेक शेयरों की कमजोरी का असर- अमेरिकी बाजारों में टेक यानी इलेक्ट्रॉनिक्स और सॉफ्टवेयर शेयरों में आई गिरावट ने पूरी दुनिया का मूड खराब कर दिया. बीते सत्र में:
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- नैस्डैक- 1.16% टूटा
- एसएंडपी 500- 0.45% गिरा
- डाऊ जोन्स- 0.25% नीचे आया
विशेषकर सेमीकंडक्टर यानी चिप बनाने वाली कंपनियों में भारी बिकवाली हुई. निवेशकों के मन में यह डर बैठ रहा है कि क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दम पर बाजार में चल रही यह रिकॉर्ड तेजी आगे भी टिक पाएगी या नहीं. इसका असर एशियाई बाजारों पर भी दिखा.
3. सैमसंग के बेहतरीन नतीजों के बाद भी मुनाफावसूली- दिग्गज टेक कंपनी सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स ने शानदार तिमाही नतीजे पेश किए. उसका ऑपरेटिंग प्रॉफिट पिछले साल के मुकाबले करीब 19 गुना बढ़ने का अनुमान है. इसके बावजूद, निवेशकों ने नए शेयर खरीदने के बजाय मुनाफा वसूलना बेहतर समझा, जिससे सैमसंग और एसके हाइनिक्स जैसी कंपनियों के शेयर गिर गए. एक्सपर्ट्स का मानना है कि लोग अब एआई से जुड़ी कंपनियों को लेकर बहुत सोच-समझकर कदम उठा रहे हैं.
'डीपसीक' की नई चिप योजना से बढ़ा दबाव
बाजार का मूड खराब करने में एक और बड़ी खबर का हाथ रहा. रिपोर्ट के मुताबिक चीनी एआई स्टार्टअप 'डीपसीक' अपनी खुद की एआई चिप तैयार कर रहा है. अगर ऐसा होता है, तो वैश्विक चिप निर्माता कंपनियों पर इसकी निर्भरता कम हो जाएगी. इस खबर से निवेशकों को डर है कि भविष्य में सेमीकंडक्टर और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर होने वाले भारी-भरकम खर्च में कमी आ सकती है, जिसके चलते ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे एआई-निर्भर बाजारों में तेज गिरावट आई.
विदेशी निवेशक अभी भी दे रहे हैं साथ
इस बड़ी गिरावट के बीच राहत की बात सिर्फ इतनी है कि विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय बाजार में लगातार खरीदारी कर रहे हैं.
- मंगलवार को विदेशी निवेशकों ने 393.19 करोड़ रुरये के शेयर खरीदे.
- घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 383.43 करोड़ रुपये की बिकवाली की.
पिछले तीन दिनों में विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में करीब 1,991 करोड़ रुपये लगा चुके हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे बाजारों में अनिश्चितता के कारण ग्लोबल इनवेस्टर्स भारत को एक सुरक्षित और स्थिर विकल्प के रूप में देख रहे हैं.
आगे क्या होगा?
आने वाले दिनों में शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की उम्मीद है. अब निवेशकों की नजर मुख्य रूप से इन तीन बातों पर रहेगी-
- अमेरिका और ईरान का विवाद आगे क्या मोड़ लेता है.
- कच्चे तेल की कीमतें कहां जाकर थमती हैं.
- जून तिमाही के आने वाले कॉरपोरेट नतीजे कैसे रहते हैं, जिससे पता चलेगा कि कंपनियां महंगाई और भू-राजनीतिक तनाव का सामना कैसे कर रही हैं.