खुलते ही कैश हुआ मार्केट! सेंसेक्स 1000 अंक लुढ़का, रुपया भी हुआ कमजोर; क्या रही वजह?
गुरुवार को शेयर बाजार भारी गिरावट का शिकार हुआ. सेंसेक्स और निफ्टी में तेज गिरावट के पीछे ईरान युद्ध को लेकर अनिश्चितता, महंगा क्रूड ऑयल, कमजोर रुपया और वैश्विक बाजारों की कमजोरी मुख्य कारण रहे.
सप्ताह के मध्य आते-आते भारतीय शेयर बाजार में अचानक तूफानी गिरावट देखी गई. वैश्विक तनाव और महंगे कच्चे तेल की कीमतों ने निवेशकों की धारणा को गहरा झटका दिया. बुधवार की मजबूत रैली के बाद गुरुवार को हुए प्रॉफिट बुकिंग ने बाजार को और नीचे खींच दिया. ईरान युद्ध पर बढ़ती अनिश्चितता, अमेरिकी बाजारों में बिकवाली और रुपये की कमजोरी ने गिरावट को तेज कर दिया. शुरुआती घंटों में ही सेंसेक्स 1,000 अंक से अधिक टूट गया और निफ्टी भी 23,000 के करीब फिसल गया.
वैश्विक तनाव से निवेशकों में घबराहट
अमेरिका द्वारा ईरान पर हमलों को रोकने की समयसीमा बढ़ाने के बाद भी युद्ध खत्म होने की उम्मीदें कमजोर होती दिखीं. ईरान ने अमेरिकी प्रस्ताव को 'एकतरफा और अनुचित' बताते हुए खारिज कर दिया. इस बीच अमेरिकी बाजारों में लगभग 2% की गिरावट और एशियाई शेयर सूचकांकों में कमजोरी ने भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ा दिया. दक्षिण कोरिया और ताइवान में टेक शेयरों की तेज गिरावट भी चिंता बढ़ाने वाला संकेत रहा.
कच्चे तेल की बढ़ी कीमतों से बाजार पर असर
ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है, जिससे भारत जैसे ऊर्जा-आयातक देशों की चिंता बढ़ी है. ट्रंप द्वारा ईरान पर हमलों को 10 दिन रोकने की घोषणा के बावजूद कच्चे तेल में अस्थिरता जारी रही. सप्ताह की शुरुआत में 6% तक की तेज उछाल और फिर गिरावट ने बाजार में अनिश्चितता पैदा कर दी. विश्लेषकों का कहना है कि युद्ध लंबा खिंचा तो भारत के मैक्रोइकोनॉमिक संकेतक दबाव में आ सकते हैं.
रुपये में रिकॉर्ड गिरावट से बढ़ी बेचैनी
शुक्रवार को रुपया टूटकर 94.25 प्रति डॉलर के ऐतिहासिक निम्न स्तर पर पहुंच गया. मध्य पूर्व युद्ध के कारण ऊर्जा आपूर्ति संकट गहराने की आशंका से डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी लगातार बढ़ रही है. विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार निकासी ने भी स्थिति बिगाड़ी. विशेषज्ञों के अनुसार रुपया निकट अवधि में 93.70 से 94.50 के दायरे में रह सकता है.
जोरदार रैली के बाद प्रॉफिट बुकिंग
पिछले दो सत्रों में बाजार में 3.5% की मजबूत तेजी रही थी. ऐसे में ऊंचे स्तर पर निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी, जिससे शुरुआती घंटों में ही आउटफ्लो बढ़ा और सेंसेक्स-निफ्टी फिसलने लगे. कमजोर वैश्विक संकेतों ने गिरावट को और गहरा दिया.
बढ़ी उतार-चढ़ाव और आगे की चुनौती
भारत VIX में 7% की बढ़त बताती है कि आने वाले दिनों में बाजार में अस्थिरता और बढ़ सकती है. विशेषज्ञों के अनुसार सब कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि ईरान युद्ध कब शांत होता है. यदि कच्चा तेल ठंडा पड़ा और युद्ध थमा तो बाजार में तेजी लौट सकती है, अन्यथा स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है.