नई दिल्ली: 13 अप्रैल को जारी आधिकारिक आंकड़ों ने एक बार फिर आम आदमी की चिंता बढ़ा दी है. फरवरी में 3.2 प्रतिशत पर रही खुदरा महंगाई दर मार्च में बढ़कर 3.4 प्रतिशत पर पहुंच गई है. हालांकि यह आंकड़ा अभी भी रिजर्व बैंक के 4 प्रतिशत के संतोषजनक स्तर के भीतर है, लेकिन खाद्य महंगाई में आई तेजी ने भविष्य के लिए सतर्क रहने का संकेत दिया है. खास तौर पर ग्रामीण इलाकों में रहने वाली आबादी पर महंगाई का असर शहरों के मुकाबले अधिक गहरा रहा है.
मार्च के महीने में खाद्य महंगाई दर में महत्वपूर्ण उछाल देखा गया है. यह फरवरी के 3.47 प्रतिशत से बढ़कर 3.87 प्रतिशत दर्ज की गई है. यह आंकड़ा बताता है कि घर की रसोई के लिए आवश्यक बुनियादी वस्तुओं की कीमतों में भारी दबाव बढ़ रहा है. ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य महंगाई दर 3.96 प्रतिशत रही, जबकि शहरों में यह 3.71 प्रतिशत थी. महंगाई का यह रुख सीधे तौर पर आम उपभोक्ता की बचत और खर्च करने की क्षमता को प्रभावित कर रहा है.
आंकड़ों का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा चांदी के आभूषणों की कीमतों में 148.61 प्रतिशत की बेतहाशा वृद्धि है. सोने और हीरे के गहने भी करीब 45.92 प्रतिशत महंगे हुए हैं. सब्जियों के मोर्चे पर टमाटर (35.99%) और फूलगोभी (34.11%) ने आम जनता को खूब रुलाया. हालांकि, कुछ राहत की खबर भी रही क्योंकि प्याज के दाम सालाना आधार पर 27.76 प्रतिशत और आलू की कीमतों में 18.98 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है.
महंगाई के मोर्चे पर ग्रामीण भारत शहरों की तुलना में अधिक बोझ झेल रहा है. मार्च में ग्रामीण क्षेत्रों की महंगाई दर 3.63 प्रतिशत रही, जो शहरी केंद्रों के 3.11 प्रतिशत के मुकाबले काफी अधिक है. यह अंतर बताता है कि आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और वितरण के स्तर पर ग्रामीण इलाकों में चुनौतियां अधिक बनी हुई हैं. व्यक्तिगत देखभाल और सामाजिक सुरक्षा जैसी विविध सेवाओं में भी 18.65 प्रतिशत की सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गई है.
पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव के बावजूद भारत में परिवहन क्षेत्र की महंगाई दर शून्य प्रतिशत पर स्थिर रही. सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल की कीमतों को स्थिर रखने के कारण जनता को परिवहन और आवाजाही के स्तर पर कोई अतिरिक्त दबाव महसूस नहीं हुआ. हालांकि, भविष्य के लिए चेतावनी जारी की गई है कि समुद्री मार्ग और बीमा लागत में संभावित वृद्धि के कारण आने वाले महीनों में गैर-खाद्य वस्तुओं की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं.
देश के विभिन्न राज्यों के बीच महंगाई के स्तर में बड़ा अंतर देखने को मिला है. तेलंगाना 5.83 प्रतिशत की दर के साथ महंगाई की सूची में सबसे ऊपर रहा. इसके बाद आंध्र प्रदेश 4.05 प्रतिशत और कर्नाटक 3.96 प्रतिशत के साथ शीर्ष तीन राज्यों में शामिल हैं. राजस्थान जैसे राज्यों में यह आंकड़ा 3.64 प्रतिशत रहा. यह प्रादेशिक असमानता दर्शाती है कि स्थानीय बाजार की परिस्थितियां भी महंगाई को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं.