'हमें सबसे ज्यादा चिंता इस बात की है कि...', यूएस टैरिफ को लेकर RBI गवर्नर ने ऐसा क्या कहा जिसे सभी को जानना चाहिए?
आरबीआई ने नए वित्तीय वर्ष की पहली नीतिगत पहल के तहत रेपो दर में 25 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की है, जिसके बाद यह 6.25% से घटकर 6% हो गई है. यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब मुद्रास्फीति नियंत्रण में दिखाई दे रही है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ के कारण वैश्विक अनिश्चितता से आर्थिक विकास पर जोखिम बढ़ गया है.
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें मुद्रास्फीति की तुलना में अमेरिकी टैरिफ के आर्थिक विकास पर प्रभाव को लेकर ज्यादा चिंता है. उन्होंने इस दौरान वैश्विक अनिश्चितताओं और व्यापारिक तनावों के भारत पर संभावित प्रभाव को रेखांकित किया.
रेपो रेट में कटौती का ऐलान
आरबीआई ने नए वित्तीय वर्ष की पहली नीतिगत पहल के तहत रेपो दर में 25 आधार अंकों की कटौती की है, जिसके बाद यह 6.25% से घटकर 6% हो गई है. यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब मुद्रास्फीति नियंत्रण में दिखाई दे रही है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ के कारण वैश्विक अनिश्चितता से आर्थिक विकास पर जोखिम बढ़ गया है.
वैश्विक अनिश्चितता से विकास दर में संशोधन
गवर्नर मल्होत्रा ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए भारत की विकास दर के अनुमान में संशोधन का मुख्य कारण वैश्विक अनिश्चितताएं हैं. उन्होंने कहा, "मुझे मुद्रास्फीति से ज्यादा विकास पर प्रभाव की चिंता है." उनके अनुसार, मुद्रास्फीति में कमी आ रही है, लेकिन अमेरिका जैसे देशों से बढ़ते टैरिफ और धीमी वैश्विक व्यापार गति भारत के निर्यात और समग्र आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकती है.
सरकार और आरबीआई की संयुक्त रणनीति
मल्होत्रा ने आश्वासन दिया कि आने वाले महीनों में सरकार और आरबीआई मिलकर विकास और मुद्रास्फीति दोनों को संभालने का प्रयास करेंगे. उन्होंने कहा, "सरकार और आरबीआई अर्थव्यवस्था में स्थिरता बनाए रखने के लिए चुनौतियों का संयुक्त रूप से प्रबंधन करेंगे." भारत की मुद्रास्फीति दर लक्ष्य सीमा के भीतर है, लेकिन वैश्विक व्यापार में और व्यवधान से विकास प्रभावित हो सकता है.
अमेरिकी टैरिफ का भारत पर सीमित प्रभाव
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिकी टैरिफ का भारत पर प्रत्यक्ष प्रभाव अन्य देशों की तुलना में कम होगा. मल्होत्रा ने कहा, "टैरिफ का प्रभाव भारत पर कुछ अन्य देशों की तुलना में काफी कम है." हालांकि, उन्होंने सतर्क रहने की जरूरत पर बल दिया, क्योंकि व्यापक व्यापार प्रतिबंध भारतीय वस्तुओं और सेवाओं की मांग को कम कर सकते हैं.
रुपये की स्थिरता और विदेशी मुद्रा भंडार
रुपये के बारे में बात करते हुए मल्होत्रा ने कहा कि वैश्विक व्यापार युद्ध और अन्य बाजारों में मुद्रा उतार-चढ़ाव के बावजूद रुपया काफी स्थिर बना हुआ है. उन्होंने यह भी जोड़ा कि आरबीआई के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार है, जो रुपये पर किसी भी दबाव को संभालने में सक्षम है.