'ना नौकरी ना निवेश फिर...', जीडीपी के आंकड़ों पर विवाद पर रघुराम राजन ने दी सफाई
आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने जीडीपी आंकड़ों पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि उन्होंने आंकड़ों पर सवाल नहीं उठाए हैं, लेकिन मजबूत विकास के बावजूद निजी निवेश और रोजगार न बढ़ने पर चिंता जताई.
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने भारत के हालिया जीडीपी विकास आंकड़ों को लेकर अपनी स्थिति साफ की है. एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए राजन ने स्पष्ट किया कि उन्होंने नवीनतम जीडीपी आंकड़ों पर न तो सवाल उठाए हैं और न ही उनका समर्थन किया है. हालांकि, उन्होंने यह सवाल जरूर खड़ा किया कि यदि देश की अर्थव्यवस्था इतनी तेजी से आगे बढ़ रही है, तो निजी निवेश, विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) और बेहतर नौकरियों के अवसरों में वृद्धि क्यों नहीं दर्ज की जा रही है.
जीडीपी के आंकड़ों पर शुरू हुआ विवाद
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (Q1 FY27) में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही. हालांकि, बेस-ईयर (आधार वर्ष) में संशोधन के बाद इन आंकड़ों को लेकर विवाद शुरू हो गया. पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग का कहना था कि पिछले साल की अवधि के जीडीपी मूल्य को कम किए जाने के कारण चालू विकास दर अधिक दिख रही है. वहीं, कुछ निजी अर्थशास्त्रियों ने डिफ्लेटर (Deflator) की गणना पर भी सवाल उठाए.
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सरकार और विशेषज्ञों की सफाई
सांख्यिकी मंत्रालय ने गर्ग की आलोचना का जवाब देते हुए कहा कि गणना की पद्धति में बदलाव व्यापक परामर्श के बाद लागू किया गया है. नए आंकड़ों के तहत अप्रैल-जून 2025 के नाममात्र (Nominal) जीडीपी मूल्य को 86.05 ट्रिलियन रुपये से संशोधित कर 80 ट्रिलियन रुपये किया गया था. दूसरी ओर, विश्व बैंक के कार्यकारी निदेशक नीलकंठ मिश्रा ने सरकार का बचाव करते हुए कहा कि 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर पर संदेह करना पूरी तरह गलत है और नई सीरीज से आर्थिक अनुमानों की विश्वसनीयता बढ़ी है.