एक कारोबारी ने अपनी वर्षों की मेहनत से खड़ी की कंपनी बेचने का फैसला सिर्फ मुनाफे के लिए नहीं, बल्कि आध्यात्मिक जीवन अपनाने के लिए किया है. Hawell’s के संस्थापक सिरिपोंग कंपनी के लिए 165 मिलियन बाट यानी करीब 47 करोड़ रुपये मांग रहे हैं. इसके बाद वह सांसारिक जीवन छोड़ना चाहते हैं.
सिरिपोंग ने 1999 में Hawell’s की शुरुआत की थी. पहला आउटलेट उसी साल दिसंबर में सेंट्रल पिंक्लाओ में खुला और ब्रांड तेजी से लोकप्रिय हुआ. तीन साल के भीतर इसकी 22 शाखाएं हो गई थीं. बचपन से आइसक्रीम पसंद करने वाले सिरिपोंग ने अपने करियर की शुरुआत भी आइसक्रीम बेचने से की थी. बाद में वह उद्यमियों से जुड़े थाई टेलीविजन कार्यक्रमों में भी नजर आए और Hawell’s किफायती कीमत पर अच्छी गुणवत्ता वाली आइसक्रीम के लिए पहचाना जाने लगा.
समय के साथ थाई आइसक्रीम बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ती गई. बड़ी कंपनियों ने कई शॉपिंग मॉल के साथ विशेष समझौते किए, जिससे दूसरे ब्रांडों के लिए वहां जगह बनाना मुश्किल हो गया. Hawell’s की शाखाएं धीरे-धीरे बंद होती गईं और सेंट्रल पिंक्लाओ का पहला स्टोर भी 2014 में बंद हो गया. सिरिपोंग ने ब्रांड को दोबारा खड़ा करने की कोशिश जारी रखी. 2023 में नॉनथाबुरी के बैंग बुआ थोंग में एक स्टैंडअलोन स्टोर खोला गया, जो फिलहाल इसका एकमात्र सक्रिय आउटलेट है.
सिरिपोंग के लिए कंपनी बेचने का मुख्य कारण कारोबार का संघर्ष नहीं, बल्कि उनकी आध्यात्मिक यात्रा है. वह लंबे समय से बौद्ध धर्म के प्रति समर्पित हैं और पिछले 15 वर्षों से भिक्षु बनने की योजना बना रहे हैं. उन्होंने बताया कि सांसारिक जीवन छोड़ने से पहले उनके पास करीब दो वर्ष हैं. इस दौरान वह जमीन लेकर एक वन आश्रम स्थापित करना चाहते हैं, जहां ध्यान और साधना कर सकें. उन्होंने बौद्ध धर्म पर लेखन और व्याख्यान भी किए हैं.
सिरिपोंग ने Hawell’s को 165 मिलियन बाट में बेचने की पेशकश की है. सौदे में करीब 2.77 एकड़ जमीन, कार्यालय, मशीनरी और लाइसेंस वाला कारखाना, Hawell’s Ice Cream & Fast Food का आउटलेट, ट्रेडमार्क, कारोबारी जानकारी और आइसक्रीम की रेसिपी शामिल हैं. खरीदार खोजने में मदद करने वाले व्यक्ति के लिए उन्होंने 5 मिलियन बाट के इनाम की भी घोषणा की है. उनका कहना है कि Hawell’s उनके और उनके परिवार के जीवन का हिस्सा रहा है, इसलिए कारोबार छोड़ने के बाद भी वह इसकी तरक्की देखना चाहते हैं.