क्रूड ऑयल हुआ सस्ता, फिर भी क्यों नहीं घटे पेट्रोल-डीजल के दाम? जानिए कब मिल सकती है राहत
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज होने के बावजूद 28 जून को देश में पेट्रोल और डीजल के दामों में कोई बदलाव नहीं किया गया है.
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार नीचे आने से लोगों को पेट्रोल और डीजल सस्ता होने की उम्मीद थी. हालांकि 28 जून के लिए जारी नई दरों ने फिलहाल उपभोक्ताओं को कोई राहत नहीं दी. सरकारी तेल कंपनियों ने देशभर में ईंधन की कीमतों को पहले की तरह ही बरकरार रखा है. वैश्विक बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में तेज गिरावट के बावजूद भारतीय बाजार में ईंधन के दाम स्थिर रहने से लोगों के बीच सवाल उठ रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार की हर हलचल का असर खुदरा कीमतों पर तुरंत दिखाई नहीं देता.
28 जून को भी नहीं बदले पेट्रोल-डीजल के रेट
सरकारी तेल कंपनियों ने 28 जून के लिए जारी पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों में किसी तरह का बदलाव नहीं किया है. करीब एक महीने से ईंधन की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं. आखिरी बार 25 मई को पेट्रोल 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल 2.71 रुपये प्रति लीटर महंगा हुआ था. इसके बाद से पुराने रेट ही लागू हैं.
प्रमुख शहरों में क्या हैं आज के दाम
दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है. मुंबई में पेट्रोल 111.21 रुपये और डीजल 97.83 रुपये प्रति लीटर है. चेन्नई में पेट्रोल 107.77 रुपये और डीजल 99.55 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है, जबकि कोलकाता में पेट्रोल 113.51 रुपये और डीजल 99.82 रुपये प्रति लीटर है. नोएडा, लखनऊ, चंडीगढ़ और पटना में भी पुराने रेट ही लागू हैं.
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कच्चा तेल क्यों हुआ सस्ता
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 3.84 प्रतिशत गिरकर 72.60 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई. वहीं डब्ल्यूटीआई क्रूड 69.23 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ. सप्ताहभर में दोनों प्रमुख बेंचमार्क में बड़ी गिरावट दर्ज की गई. विशेषज्ञों के मुताबिक पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और 60 दिन के युद्धविराम पर सहमति बनने से सप्लाई को लेकर चिंता घटी है.
तुरंत राहत क्यों नहीं मिलती
कच्चे तेल की कीमत घटने के बावजूद पेट्रोल और डीजल के दाम तुरंत कम नहीं किए जाते. भारत में तेल कंपनियां खुदरा कीमतें तय करते समय पिछले 15 दिन या एक महीने की औसत आयात लागत को आधार बनाती हैं. यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई ताजा गिरावट का असर अभी पेट्रोल पंपों पर दिखाई नहीं दे रहा है.
आने वाले दिनों में क्या मिल सकती है राहत
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक निचले स्तर पर बनी रहती हैं तो भविष्य में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत मिलने की संभावना बढ़ सकती है. भारत अपनी जरूरत का 88 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है. ऐसे में सस्ता क्रूड आयात बिल और महंगाई दोनों पर सकारात्मक असर डाल सकता है.