शेयर बाजार में सितंबर डेरिवेटिव सीरीज की शुरुआत ऐसे समय हुई है, जब Nifty एक बेहद अहम मोड़ पर खड़ा है. विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FIIs ने इंडेक्स फ्यूचर्स में करीब 1.86 लाख नेट शॉर्ट कॉन्ट्रैक्ट कायम रखे हैं, लेकिन दूसरी तरफ इसी महीने वे कैश मार्केट में 27,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की खरीदारी कर चुके हैं. यही विरोधाभास बाजार के अगले बड़े मूव को लेकर सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है.
सितंबर सीरीज के पहले कारोबारी सत्र में Nifty 50 करीब 0.52 फीसदी फिसलकर 24,207.75 पर बंद हुआ. हालांकि फ्यूचर्स में तस्वीर ज्यादा सतर्क नजर आई, जहां कीमत में मामूली गिरावट के साथ ओपन इंटरेस्ट 4.90 फीसदी बढ़ गया. इसका सीधा संकेत नए शॉर्ट सौदों की तरफ जाता है. इसी बीच कॉल ऑप्शन में बिकवाली बढ़ने से Put-Call Ratio 1.17 से घटकर 0.91 हो गया, जिससे ऊपर की तेजी पर तत्काल दबाव दिखाई दिया.
अगस्त सीरीज के अंत में बाजार ने मजबूत संकेत दिए थे. Nifty 24,288 पर छह महीने के सबसे ऊंचे एक्सपायरी स्तर पर बंद हुआ था और करीब 77.4 फीसदी रोलओवर ने तेजी की उम्मीद को मजबूती दी थी. लेकिन सितंबर की शुरुआत में विदेशी फंड्स की हेजिंग उस तेजी के रास्ते में सबसे बड़ी रुकावट बन गई.
इस दबाव को घरेलू संस्थागत निवेशकों ने काफी हद तक संभाला. बुधवार को DIIs ने करीब 6,425 करोड़ रुपये की खरीदारी की, जबकि FIIs ने भी कैश शेयरों में 503 करोड़ रुपये लगाए. इसके बावजूद इंडेक्स में सेक्टरों के बीच तस्वीर एक जैसी नहीं है. मेटल शेयरों में जोरदार तेजी आई, रियल्टी ने लंबी कंसोलिडेशन रेंज से ब्रेकआउट दिया और डिफेंस-कैपिटल गुड्स में संस्थागत दिलचस्पी बनी रही. Bank Nifty भी 0.66 फीसदी चढ़ा. इसके उलट IT और FMCG पर दबाव कायम रहा.
अब असली लड़ाई 24,000 से 24,500 के बीच है. 24,200 और 24,000 पर मजबूत पुट सपोर्ट है, जबकि 24,400-24,500 के आसपास कॉल राइटर्स ने रुकावट खड़ी कर रखी है. India VIX भी 10.56 के निचले स्तर पर है, जो लंबे समय से चल रही शांति के बाद तेज ब्रेकआउट की संभावना बढ़ाता है.
बाजार के लिए अगला निर्णायक संकेत 24,700 के ऊपर टिकने से मिलेगा. ऐसा होने पर 24,800 से आगे 25,200 और फिर 26,000 की तरफ तेजी का रास्ता खुल सकता है. दूसरी ओर 24,000 का मजबूत सपोर्ट टूट गया तो विदेशी निवेशकों की भारी शॉर्ट पोजीशन बाजार पर और दबाव डाल सकती है. अब MSCI रीबैलेंसिंग से आने वाली संस्थागत खरीदारी और अमेरिकी फेड से जुड़े संकेत यह तय करेंगे कि FIIs अपनी शॉर्ट पोजीशन काटते हैं या Nifty को और नीचे धकेलते हैं.