दशकों से भारतीय कॉफी दुबई, कुवैत सिटी और रियाद के कैफे में अपनी सुगंध बिखेर रही थी लेकिन अमेरिका-ईरान तनाव ने इस सुनहरे सपने को तार-तार कर दिया है. हॉर्मुज जलडमरूमध्य में नौसैनिक अवरोधों और बढ़ती ढुलाई लागत ने भारतीय निर्यातकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह स्थिति जारी रही, तो पश्चिम एशिया में भारत का कॉफी कारोबार 80% तक सिमट सकता है. रिपोर्ट्स के अनुसार, फरवरी में शुरू हुए इस संकट ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को हिलाकर रख दिया है.
भारत दुनिया का सातवां सबसे बड़ा कॉफी उत्पादक देश है. भारत लगभग 70% कॉफी का निर्यात करता है. पिछले दशक में संयुक्त अरब अमीरात, जॉर्डन और सऊदी अरब जैसे बाजारों ने भारत के लिए सुनहरे अवसर पैदा किए थे. साल 2024 में अकेले पश्चिम एशिया ने भारत के कुल कॉफी निर्यात में 16% से अधिक का योगदान दिया था. लेकिन अब हॉर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के कारण भारतीय कंटेनर फंस रहे हैं, रास्ता बदलना पड़ रहा है या ट्रांस-शिपमेंट पॉइंट्स पर अटके हुए हैं. इंडियन कॉफी एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रमेश राज ने बताया कि आने वाले महीनों में पश्चिम एशियाई बाजार में भारत को 80% तक नुकसान उठाना पड़ सकता है.
अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच फरवरी में शुरू हुए युद्ध के बाद से माल ढुलाई के दाम दोगुने हो गए हैं. यूरोपीय खरीदार अब युगांडा को ज्यादा भरोसेमंद विकल्प मानने लगे हैं, जिससे भारत की मेहनत से बनाई बाजार हिस्सेदारी खतरे में पड़ गई है. इसके अलावा, पाकिस्तान की मध्यस्थता में रविवार को हुई 21 घंटे की लंबी बातचीत भी बेनतीजा रही. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने साफ कहा कि तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर सहमति नहीं बन पाई और बिना किसी समझौते के वे वापस लौट रहे हैं. इस विफलता ने भारतीय निर्यातकों की चिंताओं को और हवा दे दी है.
भारतीय कॉफी उद्योग के लिए यह सुनहरा दौर था. रिपोर्ट्स के मुताबिक, निर्यात आय 2023 के 1.14 अरब डॉलर से बढ़कर इस साल रिकॉर्ड 2.13 अरब डॉलर पर पहुंच गई थी. भारत हर साल करीब 350,000-370,000 मीट्रिक टन कॉफी का उत्पादन करता है, जो वैश्विक उत्पादन का 3-4% है. बद्रा एस्टेट्स के प्रबंध निदेशक जैकब मैमन ने बताया कि 1990 के दशक में उदारीकरण के बाद भारतीय कॉफी क्षेत्र ने खुद को नए सिरे से खड़ा किया था. तब से भारत ने यूरोप और एशिया में अपनी उपस्थिति बढ़ाई है और विशेषता वाली कॉफी (स्पेशलिटी कॉफी) पर फोकस किया है.
भारत अरेबिका और रोबस्टा दोनों तरह की कॉफी का उत्पादन करता है. इसमें रोबस्टा की हिस्सेदारी लगभग 70% है. प्रीमियम रोबस्टा और मानसून मलाबार जैसी विशेष किस्मों ने इटली, जर्मनी और रूस जैसे ऊंचे बाजारों में भारत को एक अलग पहचान दिलाई है. लेकिन अब अमेरिकी-इज़राइली हमलों ने व्यापार के रास्ते बंद कर दिए हैं. संयुक्त राष्ट्र के आंकड़े बताते हैं कि साल 2014 में जहां पश्चिम एशिया में भारत का कॉफी निर्यात 12.6% था, वह 2024 में बढ़कर 16.1% हो गया था. अब यही बढ़त संकट में फंस गई है. निर्यातकों को उम्मीद है कि कूटनीतिक स्तर पर जल्द कोई हल निकलेगा, वरना भारतीय किसानों और कारोबारियों को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी.