'प्राकृतिक गैस की ओर कदम बढ़ाना देश की जरूरत', पेट्रोलियम मंत्री के बयान के क्या हैं मायने?

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने प्राकृतिक गैस को राष्ट्रीय आवश्यकता बताते हुए वर्ष 2030 तक ऊर्जा मिश्रण में इसकी हिस्सेदारी 15% करने और किसी एक ईंधन पर निर्भरता घटाने पर जोर दिया.

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Sagar Bhardwaj

पश्चिम एशिया संकट के कारण उत्पन्न वैश्विक चुनौतियों को देखते हुए केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने देश में गैस आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने पर बल दिया है. उन्होंने प्राकृतिक गैस और पाइप्ड गैस के उपयोग में तेजी लाने को राष्ट्रीय आवश्यकता करार दिया. 'पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड' (PNGRB) के 20वें स्थापना दिवस पर बोलते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत 2030 तक ऊर्जा मिश्रण में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी वर्तमान 6% से बढ़ाकर 15% करने के लक्ष्य पर तेजी से काम कर रहा है.

'समुद्र मंथन' और गोवर्धन योजनाओं से होगा सुधार

मंत्री ने बताया कि 'समुद्र मंथन' और 'गोवर्धन' जैसी प्रमुख योजनाओं के माध्यम से घरेलू स्तर पर तेल एवं गैस की उपलब्धता में सुधार होगा. पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता पर सतर्क रहने की चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा कि वैश्विक बाजार में आई भारी अनिश्चितता के बावजूद भारत ने अपने घरेलू उपभोक्ताओं को वैश्विक ईंधन कीमतों में हुई बढ़ोतरी से काफी हद तक सुरक्षित रखा है.


गैस अर्थव्यवस्था का विस्तार समय की मांग

वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में 70-80% की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि बीते चार से पांच महीनों में भारत में ईंधन के दामों में केवल 7-8% का ही मामूली इजाफा हुआ. पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल ने भी कहा कि भारत इस बड़े ऊर्जा संकट से बिना किसी किल्लत या कीमतों में भारी उछाल के सुरक्षित बाहर निकला है. उन्होंने दोहराया कि किसी एक ईंधन स्रोत पर निर्भर न रहकर गैस अर्थव्यवस्था का विस्तार करना समय की मांग है.