नई दिल्ली: अगर आप लंबे समय में बड़ा फंड बनाना चाहते हैं, तो सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी SIP एक अच्छा विकल्प हो सकता है. नियमित और अनुशासित निवेश के जरिए 1 करोड़ रुपये का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है.
खास बात यह है कि यदि निवेश की शुरुआत कम उम्र में की जाए, तो हर महीने सिर्फ 2000 से 6000 रुपये की SIP भी समय के साथ 1 करोड़ रुपये से अधिक का फंड बना सकती है. इसका सबसे बड़ा कारण कंपाउंडिंग का फायदा है, जिसमें निवेश पर मिलने वाला रिटर्न भी आगे चलकर रिटर्न कमाने लगता है.
SIP में निवेशक हर महीने एक तय रकम म्यूचुअल फंड में निवेश करता है. बाजार में उतार चढ़ाव के बावजूद नियमित निवेश करने से रुपया कॉस्ट एवरेजिंग का लाभ मिलता है. इससे लंबे समय में बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना बढ़ जाती है. हालांकि म्यूचुअल फंड बाजार जोखिमों के अधीन होते हैं और रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती, लेकिन डाइवर्सिफाइड इक्विटी म्यूचुअल फंड ने लंबे समय में अच्छे रिटर्न दिए हैं. यह अनुमान 12 प्रतिशत सालाना रिटर्न और 60 वर्ष की उम्र तक निवेश जारी रखने के आधार पर तैयार किया गया है.
यदि कोई व्यक्ति 25 वर्ष की उम्र में हर महीने 2000 रुपये की SIP शुरू करता है और लगातार 35 वर्षों तक निवेश करता है, तो उसका कुल निवेश 8.40 लाख रुपये होगा. अनुमानित 12 प्रतिशत वार्षिक रिटर्न के आधार पर उसे करीब 1.02 करोड़ रुपये का रिटर्न मिल सकता है और कुल फंड लगभग 1.10 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है.
अगर निवेश की शुरुआत 30 वर्ष की उम्र में की जाए और हर महीने 3300 रुपये निवेश किए जाएं, तो 30 वर्षों में कुल निवेश 11.88 लाख रुपये होगा. अनुमानित मैच्योरिटी राशि करीब 1.02 करोड़ रुपये हो सकती है.
35 वर्ष की उम्र में हर महीने 6000 रुपये की SIP शुरू करने पर 25 वर्षों में कुल निवेश 18 लाख रुपये होगा. अनुमानित रिटर्न के साथ मैच्योरिटी पर करीब 1.02 करोड़ रुपये का फंड बन सकता है.
यदि कोई व्यक्ति 40 वर्ष की उम्र में निवेश शुरू करता है, तो उसे 20 वर्षों तक हर महीने लगभग 11000 रुपये निवेश करने होंगे. इस दौरान कुल निवेश 26.40 लाख रुपये होगा और अनुमानित मैच्योरिटी राशि करीब 1.01 करोड़ रुपये हो सकती है.
इस उदाहरण से साफ है कि जितनी जल्दी SIP शुरू की जाती है, उतनी ही कम मासिक राशि से बड़ा फंड तैयार किया जा सकता है. समय और कंपाउंडिंग की ताकत लंबी अवधि के निवेशकों के लिए सबसे बड़ा लाभ साबित होती है. हालांकि निवेश से पहले अपनी जोखिम क्षमता, वित्तीय लक्ष्य और किसी वित्तीय सलाहकार की सलाह को भी ध्यान में रखना चाहिए.