सरकार करने जा रही टैक्स नियमों में बड़ा बदलाव! विदेशी निवेश और उद्योगों को मिल सकती है बड़ी राहत
केंद्र सरकार टैक्स कानून में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है. प्रस्तावित Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 के जरिए विदेशी निवेशकों, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, डेटा सेंटर और अन्य क्षेत्रों को कर राहत देने की योजना है.
नई दिल्ली: केंद्र सरकार विदेशी निवेश को बढ़ावा देने और देश में विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत करने के उद्देश्य से Taxation and Other Laws (Amendment) Bill 2026 संसद में पेश करने की तैयारी कर रही है. प्रस्तावित विधेयक में विदेशी निवेशकों, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, डेटा सेंटर, आरईआईटी, इनविट और सरकारी बॉन्ड में निवेश करने वालों के लिए कई कर राहत के प्रावधान शामिल किए जा सकते हैं.
रिपोर्टों के अनुसार सरकार घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को उत्पाद उपलब्ध कराने वाले विदेशी सप्लायरों के लिए टैक्स छूट की अवधि बढ़ाने पर विचार कर रही है. इसके साथ ही डेटा सेंटर और हीरा खनन क्षेत्र को भी कर संबंधी राहत देने का प्रस्ताव है.
सरकार का क्या है मानना?
प्रस्तावित संशोधन के तहत कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी टैक्स छूट की अवधि मौजूदा 2031 की समय सीमा से बढ़ाकर 2041 तक करने का सुझाव दिया गया है. इस दायरे में मोबाइल फोन, लैपटॉप, टैबलेट और सर्वर जैसे इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद शामिल हो सकते हैं. सरकार का मानना है कि इससे भारत वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण का प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ सकेगा.
Also Read
इसके अलावा सरकार एक मौजूदा अध्यादेश को कानून का रूप देने पर भी विचार कर रही है. इसके तहत विदेशी संस्थागत निवेशकों को सरकारी प्रतिभूतियों से मिलने वाले ब्याज और कुछ निवेशों की बिक्री या हस्तांतरण से होने वाले पूंजीगत लाभ पर कर राहत देने का प्रावधान शामिल हो सकता है.
विशेषज्ञों का क्या है मानना?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह विधेयक पारित होता है तो भारत में विदेशी निवेश आकर्षित करने में मदद मिलेगी. इससे रुपये को मजबूती मिल सकती है, अर्थव्यवस्था को वैश्विक झटकों से सुरक्षा मिलेगी और भारतीय शेयर बाजार में भी सकारात्मक माहौल बन सकता है. विदेशी निवेशकों की भागीदारी बढ़ने से बाजार में निवेश का प्रवाह तेज होने की संभावना है.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के मौजूदा संसद सत्र के दौरान इस विधेयक को पेश किए जाने की संभावना जताई जा रही है. हालांकि संसद में विभिन्न मुद्दों पर जारी गतिरोध के कारण विधायी कार्य प्रभावित हुआ है. मौजूदा सत्र 13 अगस्त तक चलना है और सरकार के सामने इस महत्वपूर्ण विधेयक को पारित कराने की चुनौती भी बनी हुई है.
फिलहाल यह एक प्रस्तावित विधेयक है. इसमें शामिल प्रावधान तभी लागू होंगे जब संसद इसे पारित करेगी और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी होगी.