सोने-चांदी के भाव में बड़ा उलटफेर, सिल्वर 2 लाख रुपये से नीचे आई; गोल्ड भी हुआ सस्ता
सोने और चांदी की कीमतों में आई बड़ी गिरावट ने खरीदारों और निवेशकों का ध्यान खींचा है. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोना करीब 2 प्रतिशत और चांदी लगभग 5 प्रतिशत टूट गई.
Gold-Silver Price: सोना और चांदी खरीदने का इंतजार कर रहे लोगों के लिए कीमती धातुओं के बाजार से बड़ी खबर सामने आई है. गुरुवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर दोनों धातुओं के वायदा भाव में तेज गिरावट दर्ज की गई. चांदी की कीमत में आई कमजोरी सबसे ज्यादा चर्चा में रही, क्योंकि इसका भाव 2 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के अहम स्तर से नीचे पहुंच गया. सोने की कीमत में भी करीब 2 प्रतिशत की गिरावट आई.
सोना 1.43 लाख रुपये के स्तर पर पहुंचा
एमसीएक्स पर 4 दिसंबर 2026 की एक्सपायरी वाला गोल्ड फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट 2.03 प्रतिशत गिरकर 1,43,069 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता दिखाई दिया. सोने की कीमत में आई इस गिरावट ने बाजार में हलचल बढ़ा दी है. निवेशक अब आगे की चाल पर नजर रख रहे हैं.
चांदी में 10,284 रुपये की भारी गिरावट
चांदी के वायदा भाव में सोने के मुकाबले ज्यादा कमजोरी देखने को मिली. एमसीएक्स पर 4 दिसंबर 2026 की एक्सपायरी वाला सिल्वर फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट 4.92 प्रतिशत टूटकर 1,98,884 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया. इसमें 10,284 रुपये की गिरावट दर्ज की गई.
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कच्चे तेल की तेजी से क्यों बढ़ी बाजार की चिंता?
बाजार रिपोर्ट में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल को सोने और चांदी पर दबाव पड़ने की एक वजह बताया गया है. तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने की आशंका पैदा हो सकती है. ऐसी परिस्थितियों में निवेशकों की रणनीति बदल सकती है और कीमती धातुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है.
क्या अभी सोना-चांदी खरीदने का सही मौका है?
कीमतों में गिरावट से खरीदारों को राहत की उम्मीद जरूर मिल सकती है, लेकिन खरीदारी से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है. एमसीएक्स के वायदा भाव और सराफा दुकानों पर मिलने वाली कीमतों में अंतर हो सकता है. खुदरा खरीदारी में जीएसटी, मेकिंग चार्ज और अन्य लागत भी जुड़ती हैं.
आगे क्या करें खरीदार और निवेशक?
सोने और चांदी में आई गिरावट के बाद बाजार की अगली चाल पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा. मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि गुरुवार को दोनों धातुओं के वायदा भाव में कमजोरी रही, लेकिन इससे भविष्य की कीमतों की दिशा तय नहीं होती. खरीदारों के लिए बेहतर होगा कि वे जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय स्थानीय भाव की तुलना करें और खरीदारी से पहले कुल लागत समझें. वहीं, निवेशकों को केवल एक दिन की गिरावट के आधार पर बड़ा निवेश करने से बचना चाहिए. कीमतों में आगे होने वाले बदलाव पर अंतरराष्ट्रीय बाजार और आर्थिक परिस्थितियों का असर पड़ सकता है.