गुजरात: क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि कोई व्यक्ति बस के टिकट के पैसे लेकर शहर आए और एक दिन हजारों करोड़ की कंपनी खड़ी कर दे. यह कहानी है गुजरात के दुधाला गांव के सावजी ढोलकिया की, जिन्होंने साबित कर दिया कि सफलता डिग्री की मोहताज नहीं, बल्कि मेहनत और नेक नीयत की दीवानी होती है.
1977 में एक 13 साल का लड़का घर की तंगी के कारण स्कूल छोड़कर सूरत के लिए निकलता है. जेब में बस का टिकट कटाने के बाद सिर्फ चंद पैसे बचे थे. सावजीभाई ने एक हीरा फैक्ट्री में 179 रुपये महीने की तनख्वाह पर काम शुरू किया. उस छोटी सी रकम में से भी वे हर महीने पैसे बचाते थे. यही अनुशासन उनके भविष्य के साम्राज्य की नींव बना.
1984 में सावजीभाई ने अपने भाइयों के साथ मिलकर हरि कृष्णा एक्सपोर्ट्स की शुरुआत की. आज उनका बिजनेस दुनिया भर में फैला है और उनका ज्वेलरी ब्रांड 'KISNA' घर-घर में पहचाना जाता है. रिपोर्ट्स के अनुसार, उनकी कंपनी का टर्नओवर अब 12,000 करोड़ रुपये को पार कर चुका है.
सावजी ढोलकिया की सबसे खास बात उनका अपने कर्मचारियों के प्रति प्रेम है. वे दिवाली बोनस के रूप में मिठाई नहीं, बल्कि कार, फ्लैट और फिक्स्ड डिपॉजिट गिफ्ट करने के लिए पूरी दुनिया में मशहूर हैं. हाल ही में उन्होंने अपने तीन सीनियर कर्मचारियों को 3-3 करोड़ रुपये की मर्सिडीज-बेंज GLS SUV गिफ्ट की. ये वो कर्मचारी थे जो पिछले 25 सालों से उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे.
सावजीभाई सिर्फ पैसा कमाना ही नहीं, बल्कि समाज को वापस देना भी जानते हैं. उनके 'ढोलकिया फाउंडेशन' ने जल संरक्षण और पौधारोपण के क्षेत्र में अद्भुत काम किया है. इसी सेवा भाव के लिए भारत सरकार ने उन्हें 2022 में पद्म श्री से सम्मानित किया.
सावजी ढोलकिया की कहानी हमें सिखाती है कि सच्ची अमीरी बैंक बैलेंस में नहीं, बल्कि लोगों का दिल जीतने में है. 5वीं फेल होने के बावजूद उन्होंने मैनेजमेंट का वो पाठ पढ़ाया जो बड़े-बड़े कॉलेज नहीं सिखा पाते" अगर आप अपने लोगों का ख्याल रखेंगे, तो आपके लोग आपके बिजनेस का ख्याल रखेंगे."