सैलरी स्लिप देखकर हो जाएंगे कन्फ्यूज! सितंबर में कटेगा अलग PF? जानें आपके अकाउंट में कितना आएगा पैसा

EPFO ने 17 सितंबर 2026 से अनिवार्य EPF कवरेज की वेतन सीमा 15 हजार रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दी है. इस बदलाव की वजह से सितंबर महीने की PF कटौती हर कर्मचारी के लिए एक जैसी नहीं रहेगी.

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Reepu Kumari

नई दिल्ली: अगर आपकी मासिक सैलरी 15 हजार रुपये से ज्यादा लेकिन 25 हजार रुपये तक है, तो इस बार आपकी सैलरी स्लिप देखकर आप थोड़ा चौंक सकते हैं. दरअसल EPFO ने अनिवार्य EPF कवरेज की वेतन सीमा में बड़ा बदलाव किया है, जिसका सीधा असर आधे महीने पुराने और आधे महीने नए नियम पर आधारित कैलकुलेशन पर पड़ रहा है. इस नए नियम के लागू होने से पहले जो कर्मचारी वेतन सीमा से बाहर होने की वजह से अनिवार्य EPF कवरेज में नहीं आते थे, वे अब दायरे में आ गए हैं. लेकिन सितंबर महीने में उनकी कटौती किस आधार पर होगी, यह उनकी पुरानी सदस्यता स्थिति तय करेगी. आइए तीन अलग-अलग स्थितियों के जरिए इसे आसान भाषा में समझते हैं.

जो पहली बार बने हैं EPF सदस्य

मान लीजिए किसी कर्मचारी की सैलरी 20 हजार रुपये है और वह 16 सितंबर तक EPF का सदस्य नहीं था. ऐसे कर्मचारी के लिए महीने के पहले हिस्से यानी 1 से 16 सितंबर तक कोई कटौती नहीं होगी. सिर्फ 17 से 30 सितंबर के 14 दिनों की सैलरी पर ही कैलकुलेशन होगी, जो करीब 9,333 रुपये बनती है. इस पर कर्मचारी का 12 फीसदी हिस्सा यानी करीब 1,120 रुपये कटेगा.

जो पहले से PF सदस्य थे, अब EPS में जुड़े

दूसरी स्थिति उन कर्मचारियों की है, जो पहले से EPF में तो थे लेकिन EPS में 17 सितंबर से जुड़े हैं. ऐसे कर्मचारियों की पूरी महीने की सैलरी यानी 20 हजार रुपये पर ही 12 फीसदी कटौती होगी, जो 2,400 रुपये बैठती है. कंपनी की तरफ से भी महीने के दोनों हिस्सों के लिए अलग-अलग योगदान जाएगा, जिससे कुल मिलाकर EPF-EPS में करीब 4,800 रुपये का योगदान बनता है.


दोनों स्कीम के पुराने सदस्यों का अलग हिसाब

तीसरी स्थिति उन लोगों की है, जो पहले से EPF और EPS दोनों में शामिल थे. इनके लिए महीने को दो हिस्सों में बांटा जाएगा. 1 से 16 सितंबर तक पुरानी 15 हजार की सीमा और 17 से 30 सितंबर तक नई सैलरी के आधार पर कैलकुलेशन होगी. दोनों को जोड़ने पर कुल सैलरी करीब 17,333 रुपये बनती है, जिस पर 12 फीसदी यानी 2,080 रुपये कर्मचारी का योगदान होगा.

EPF, EPS और EDLI को समझना क्यों जरूरी?

कर्मचारियों के लिए यह समझना बेहद जरूरी है कि EPF, EPS और EDLI का मकसद अलग-अलग है. कर्मचारी की सैलरी से 12 फीसदी सीधे EPF में जाता है, जबकि कंपनी का योगदान EPF और EPS में बंटता है. EDLI का पैसा कंपनी देती है और यह जीवन बीमा से जुड़ा लाभ है, जो PF खाते में नहीं जुड़ता. इसलिए सिर्फ नई वेतन सीमा देखकर यह मान लेना गलत होगा कि हर किसी की कटौती एक जैसी रहेगी. बेहतर होगा कि कर्मचारी अपनी सैलरी स्लिप और EPFO रिकॉर्ड जरूर जांच लें.