EPFO Alert: फर्जी लिंक से रहें सावधान, किसी को न दें UAN और OTP की जानकारी
EPFO ने सदस्यों को फर्जी लिंक और साइबर ठगी से सावधान किया है. संगठन ने कहा है कि UAN, आधार, पैन, बैंक जानकारी या OTP अनजान व्यक्ति से साझा न करें और ठगी से बचें.
ईपीएफओ सेवाएं ऑनलाइन होने के साथ साइबर ठगी का खतरा बढ़ा है. फर्जी वेबसाइट, संदेश और लिंक के जरिए जालसाज सदस्यों की निजी जानकारी हासिल कर सकते हैं. EPFO ने लोगों से सतर्क रहने और संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से पहले URL जांचने और सुरक्षित रहने की सलाह दी है.
फर्जी लिंक पर क्लिक करने से पहले जांचें URL
EPFO ने अपने सदस्यों को ऑनलाइन गतिविधियों के दौरान विशेष सावधानी बरतने को कहा है. जालसाज अक्सर आधिकारिक वेबसाइट जैसी दिखने वाली फर्जी साइट या लिंक भेजकर लोगों को भ्रमित करते हैं. ऐसे लिंक SMS, ईमेल, सोशल मीडिया या मैसेजिंग ऐप के जरिए आ सकते हैं. किसी भी लिंक को खोलने से पहले उसके URL को ध्यान से देखना जरूरी है. वेबसाइट के नाम या स्पेलिंग में मामूली बदलाव भी फर्जीवाड़े का संकेत हो सकता है. EPFO की सेवाओं के लिए केवल उसके आधिकारिक माध्यमों का इस्तेमाल करना सुरक्षित तरीका है.
UAN, आधार और OTP की जानकारी किसी से साझा न करें
EPFO ने साफ किया है कि सदस्य अपनी संवेदनशील जानकारी को लेकर बेहद सावधान रहें. UAN, PPO, आधार, पैन, बैंक खाते से जुड़ी जानकारी, पासवर्ड और OTP जैसी डिटेल किसी अनजान व्यक्ति को नहीं देनी चाहिए. ठग अक्सर खुद को EPFO अधिकारी बताकर कॉल या मैसेज करते हैं और खाते से जुड़ी जानकारी मांग सकते हैं. ऐसी स्थिति में बातचीत आगे बढ़ाने के बजाय आधिकारिक माध्यम से जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए. किसी संदिग्ध लिंक पर लॉगिन करना या निजी विवरण भरना भी भारी नुकसान का कारण बन सकता है.
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फोन, WhatsApp या सोशल मीडिया पर EPFO बनकर आए मैसेज से बचें
EPFO के अनुसार संगठन अपने सदस्यों से फोन कॉल, WhatsApp, SMS, सोशल मीडिया या ईमेल के जरिए निजी जानकारी, OTP या लॉगिन विवरण मांगने का काम नहीं करता. इसलिए अगर कोई व्यक्ति EPFO अधिकारी बनकर ऐसी जानकारी मांगता है, तो उस पर भरोसा नहीं करना चाहिए.
EPFO ने यह भी सलाह दी है कि सदस्य अनधिकृत एजेंटों और फर्जी वेबसाइटों से बचें. किसी समस्या की स्थिति में आधिकारिक पोर्टल या EPFO के निर्धारित हेल्पडेस्क से संपर्क करना बेहतर है. इस तरह थोड़ी सावधानी से खाते और व्यक्तिगत जानकारी को साइबर ठगी से सुरक्षित रखा जा सकता है.