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India Daily

ड्रैगन को पटखनी देने भारत का मास्टरस्ट्रोक! बजट में 23 हजार करोड़ की सौगात देने का बड़ा प्लान; इंपोर्ट गेम होगा ओवर

केंद्र सरकार बजट 2026-27 में चीन पर निर्भरता घटाने के लिए बड़ा दांव खेलने जा रही है. भारी मशीनरी और ऑटो सेक्टर में घरेलू उत्पादन बढ़ाने हेतु ₹23,000 करोड़ के प्रोत्साहन की तैयारी है.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
ड्रैगन को पटखनी देने भारत का मास्टरस्ट्रोक! बजट में 23 हजार करोड़ की सौगात देने का बड़ा प्लान; इंपोर्ट गेम होगा ओवर
Courtesy: grok

भारत अब मैन्युफैक्चरिंग के मोर्चे पर चीन को सीधी चुनौती देने की रणनीति पर काम कर रहा है. वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में सरकार एक ऐसा ऐलान कर सकती है, जो आयात आधारित अर्थव्यवस्था को झटका दे सकेगा. भारी और महंगे कैपिटल गुड्स के लोकल प्रोडक्शन को बढ़ावा देने के लिए 23 हजार करोड़ रुपये तक के इंसेंटिव पैकेज की तैयारी है. इसका मकसद सिर्फ आत्मनिर्भरता नहीं, बल्कि चीन के दबदबे को कमजोर करना है.

चीन निर्भरता तोड़ने की रणनीति

सरकार का यह मास्टर प्लान सीधे तौर पर चीन से होने वाले आयात पर निर्भरता कम करने पर केंद्रित है. अभी भारत की कई बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर और ऑटो परियोजनाएं चीनी मशीनरी और कंपोनेंट्स पर टिकी हैं. नए बजट प्रस्ताव के जरिए सरकार चाहती है कि भारत खुद हाई-एंड मशीनें बनाए, ताकि सप्लाई चेन पर चीन का दबाव खत्म हो और रणनीतिक सेक्टर्स सुरक्षित रह सकें.

कहां खर्च होंगे 23 हजार करोड़ रुपये

सूत्रों के मुताबिक, इस इंसेंटिव पैकेज का बड़ा हिस्सा निर्माण उपकरण सेक्टर को मिलेगा. लगभग 14 हजार से 16 हजार करोड़ रुपये का कार्यक्रम भारी मशीनरी के लिए तय किया जा रहा है. वहीं, ऑटोमोबाइल सेक्टर में ग्लोबल वैल्यू चेन मजबूत करने के लिए करीब ₹7,000 करोड़ की योजना पर काम चल रहा है. इन कदमों से कैपिटल गुड्स सेक्टर को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है.

हैवी मशीनरी में चीन को सीधी टक्कर

टनल बोरिंग मशीन, क्रेन और अन्य हाई-लेवल कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट अभी बड़े पैमाने पर आयात किए जाते हैं. मूल्य के लिहाज से इस सेक्टर के करीब 50 फीसदी कंपोनेंट्स चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और जर्मनी से आते हैं. सरकार अब इन मशीनों का स्वदेशीकरण चाहती है, ताकि भविष्य में किसी देश के प्रतिबंध भारतीय परियोजनाओं को रोक न सकें.

चीन के प्रतिबंधों से मिला सबक

पिछले साल चीन ने टनल बोरिंग मशीन के निर्यात पर रोक लगाकर भारत के कई बड़े इंफ्रा प्रोजेक्ट्स को प्रभावित किया था. बाद में राजनयिक बातचीत के बाद प्रतिबंध हटे, लेकिन इस घटना ने भारत को आत्मनिर्भर बनने का सबक दे दिया. नई योजना का लक्ष्य हाइड्रोलिक्स, अंडरकैरिज, ईसीयू, सेंसर और टेलीमैटिक्स जैसे अहम कंपोनेंट्स का देश में निर्माण बढ़ाना है.

ऑटो सेक्टर में भी चीन पर वार

ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए प्रस्तावित जीवीसी योजना आधुनिक तकनीक पर केंद्रित है. एडवांस ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम, 360 डिग्री कैमरे और सेंसर जैसे फीचर्स को भारत में ही बनाने पर जोर होगा. इन उत्पादों में कम से कम 50 फीसदी घरेलू वैल्यू एडिशन को समर्थन दिया जाएगा, जिससे आयात घटेगा और निर्यात के नए रास्ते खुलेंगे.

आत्मनिर्भरता से आगे, वैश्विक लक्ष्य

सरकार का मकसद सिर्फ चीन से दूरी बनाना नहीं है, बल्कि भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना भी है. ऑटो पार्ट्स के लिए मोल्ड, पावर टूल्स और प्रोटोटाइपिंग सेंटर्स पर सब्सिडी दी जाएगीय. इससे भारतीय कंपनियां टेक्नोलॉजी में मजबूत होंगी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीन को कड़ी चुनौती दे सकेंगी.