पेट्रोल-डीजल की कीमतों की हर 15 दिन में होगी समीक्षा, मिडिल ईस्ट संकट के बीच सरकार का बड़ा फैसला
सरकार अब हर 15 दिन में पेट्रोल-डीजल की कीमतों की समीक्षा करेगी. एक्साइज ड्यूटी घटाने के बाद यह कदम वैश्विक तेल कीमतों के उतार-चढ़ाव का असर आम लोगों तक पहुंचाने और बाजार संतुलन बनाए रखने के लिए उठाया गया है.
देश में बढ़ती ईंधन कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने नई रणनीति अपनाई है. पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती के बाद अब सरकार हर 15 दिन में कीमतों की समीक्षा करेगी. इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव का फायदा सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाना है. सरकार का मानना है कि इससे बाजार में स्थिरता बनी रहेगी और जरूरत पड़ने पर समय रहते हस्तक्षेप किया जा सकेगा.
सरकार की नई रणनीति
एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती के बाद सरकार अब स्थिति पर लगातार नजर रखेगी. पेट्रोल पर केंद्रीय एक्साइज 11.9 रुपये और डीजल पर 7.8 रुपये प्रति लीटर रह गया है. अधिकारियों के अनुसार, यह फैसला तुरंत लागू किया गया है और फिलहाल खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है.
तेल कंपनियों को राहत का प्रयास
इस कदम का मुख्य उद्देश्य तेल विपणन कंपनियों की अंडर-रिकवरी को कम करना है. वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और सप्लाई में रुकावट के कारण कंपनियों पर दबाव बढ़ा था. सरकार चाहती है कि इस राहत से कंपनियों को स्थिरता मिले और उपभोक्ताओं पर अचानक कीमतों का बोझ न पड़े.
वैश्विक संकट का असर
मध्य पूर्व में जारी तनाव ने ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है. होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा के कारण कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं. यह मार्ग दुनिया के बड़े हिस्से के तेल और गैस आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण है, जिससे भारत जैसे आयातक देशों पर सीधा असर पड़ता है.
सप्लाई को लेकर आश्वासन
सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल तेल और गैस की कोई कमी नहीं है. देश में पर्याप्त भंडार मौजूद है और रिफाइनरी पूरी क्षमता से काम कर रही हैं. अधिकारियों का कहना है कि नियमित समीक्षा से स्थिति के अनुसार तुरंत फैसले लिए जा सकेंगे और बाजार को संतुलित रखा जाएगा.