प्रसिद्ध उद्यमी और निवेशक विनोद खोसला ने नई दिल्ली में आयोजित 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026' में भविष्य को लेकर एक चौंकाने वाला दावा किया है. उन्होंने कहा कि जिस तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई का विकास हो रहा है, उसे देखते हुए 2050 तक दुनिया में पारंपरिक नौकरियों की आवश्यकता ही नहीं बचेगी. खोसला का मानना है कि तकनीक का यह बदलाव विशेष रूप से भारत जैसे देशों के लिए एक बड़ी चुनौती और अवसर दोनों लेकर आएगा, जहां अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा आईटी पर निर्भर है.
खोसला ने चेतावनी दी है कि अगले पांच वर्षों के भीतर आईटी सेवाओं और बीपीओ कंपनियों का अस्तित्व लगभग पूरी तरह समाप्त हो जाएगा. उनके अनुसार 2030 तक आउटसोर्सिंग उद्योग का नामोनिशान नहीं बचेगा. उन्होंने अफसोस जताया कि भारत में बहुत से लोग अभी भी यह मानने को तैयार नहीं हैं कि तकनीक इतना बड़ा बदलाव लाने वाली है. एआई की कार्यक्षमता भविष्य में सफेदपोश नौकरियों (वाइट-कॉलर जॉब्स) के एक बहुत बड़े हिस्से को समाज से स्थायी रूप से खत्म कर देगी.
दिग्गज कंपनियों में लंबे समय तक टिके रहने वाले कर्मचारियों पर भी खोसला ने तीखी टिप्पणी की है. उन्होंने कहा कि जो लोग सिस्को जैसी बड़ी कंपनियों में 15-20 साल तक काम करते हैं, वे नई तकनीकों के प्रति अपनी अनुकूलन क्षमता खो देते हैं. ऐसे लोग बदलते तकनीकी परिदृश्य में 'अनुपयुक्त' हो जाते हैं क्योंकि वे बड़ी कंपनियों के पुराने और सुस्त ढांचे में जकड़ जाते हैं. एआई के इस प्रतिस्पर्धी दौर में केवल वे ही सफल होंगे जो निरंतर नया सीखने की क्षमता रखते हैं.
भविष्यवाणियों के साथ ही खोसला ने एआई के क्षेत्र में भारत के हालिया प्रयासों की जमकर प्रशंसा भी की. उन्होंने कहा कि 'एआई इम्पैक्ट समिट' की जबरदस्त सफलता इस बात का प्रमाण है कि भारत इस तकनीक को लेकर बहुत उत्साहित है. इस कार्यक्रम में तीन लाख से अधिक लोगों के पंजीकरण ने इसके व्यापक प्रभाव को दिखाया है. उन्होंने उल्लेख किया कि उनकी अपनी भतीजी भी अत्यधिक भीड़ के कारण इस शिखर सम्मेलन में पंजीकरण नहीं करा पाई थी, जो इसकी लोकप्रियता को दर्शाता है.
विनोद खोसला ने देशों के लिए अपने स्वयं के संप्रभु एआई मॉडल (Sovereign AI Models) विकसित करने की पुरजोर वकालत की है. उनका मानना है कि साइबर सुरक्षा और रक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के लिए विदेशी एआई मॉडलों पर निर्भर रहना खतरनाक हो सकता है. इसी सोच के साथ उन्होंने भारतीय एआई स्टार्टअप 'सर्वम' में निवेश किया है. प्रत्येक राष्ट्र का अपना एआई मॉडल होना चाहिए जो उसके राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा मानकों के पूर्णतः अनुरूप तैयार किया गया हो ताकि डेटा सुरक्षित रहे.
एआई का सबसे सकारात्मक उपयोग भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाने में हो सकता है. खोसला ने सुझाव दिया कि एआई के जरिए हर भारतीय को 24 घंटे मुफ्त या बहुत कम कीमत पर एआई डॉक्टर की सुविधा प्रदान की जा सकती है. यह तकनीक दूरदराज के गांवों में चिकित्सा परामर्श पहुंचाने में गेम-चेंजर साबित होगी. अगर एआई को सही दिशा में मोड़ा जाए, तो यह समाज के सबसे निचले तबके के लिए स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा वरदान साबित हो सकता है.