बजट 2026 से सैलरी क्लास को बड़ी उम्मीद, स्टैंडर्ड डिडक्शन पर हो सकता है बड़ा फैसला
केंद्रीय बजट 2026 से पहले वेतनभोगी करदाताओं को स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ने की उम्मीद है. महंगाई के दबाव के बीच विशेषज्ञ 1 लाख रुपये तक की सीमा या आय से जुड़े डिडक्शन की मांग कर रहे हैं.
नई दिल्ली: केंद्रीय बजट 2026 पेश होने में अब कुछ ही दिन बचे हैं और इसी के साथ आम करदाताओं की उम्मीदें भी तेज हो गई हैं. खास तौर पर सैलरी पाने वाले कर्मचारी और पेंशनर्स बढ़ती महंगाई के बीच टैक्स में राहत की आस लगाए बैठे हैं. मौजूदा समय में स्टैंडर्ड डिडक्शन की सीमा सीमित मानी जा रही है. ऐसे में यह चर्चा तेज है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस बार बजट में स्टैंडर्ड डिडक्शन को बढ़ाकर मध्यम वर्ग को सीधी राहत दे सकती हैं.
सैलरी टैक्सपेयर्स की सबसे बड़ी उम्मीद
वेतनभोगी करदाता लंबे समय से टैक्स ढांचे में सरल और सीधी राहत की मांग करते रहे हैं. स्टैंडर्ड डिडक्शन ऐसा माध्यम है, जिससे बिना किसी दस्तावेजी झंझट के टैक्सेबल इनकम कम हो जाती है. महंगाई, किराया, स्वास्थ्य और रोजमर्रा के खर्च लगातार बढ़ने से सैलरी क्लास को लग रहा है कि मौजूदा डिडक्शन उनकी वास्तविक जरूरतों को पूरा नहीं करता.
वर्तमान में कितना मिलता है डिडक्शन
अभी पुरानी टैक्स व्यवस्था में सैलरी पाने वाले कर्मचारियों और पेंशनर्स को 50 हजार रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता है. वहीं नई टैक्स व्यवस्था के तहत यह सीमा ₹75,000 तय है. हालांकि नई व्यवस्था में टैक्स स्लैब सरल हैं, लेकिन सीमित डिडक्शन के कारण कई टैक्सपेयर्स अब भी पुरानी व्यवस्था को प्राथमिकता देते हैं.
1 लाख रुपये तक बढ़ाने की क्यों है मांग
टैक्स विशेषज्ञों का मानना है कि स्टैंडर्ड डिडक्शन को ₹1 लाख तक बढ़ाना या फिर आय के एक निश्चित प्रतिशत से जोड़ना ज्यादा व्यावहारिक होगा. इससे कम और मध्यम आय वर्ग को समान रूप से लाभ मिलेगा. पेंशनर्स के लिए यह राहत और भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि उनकी आय सीमित होती है, जबकि खर्च लगातार बढ़ते रहते हैं.
स्टैंडर्ड डिडक्शन कैसे देता है सीधा फायदा
स्टैंडर्ड डिडक्शन टैक्सेबल सैलरी से सीधे घटाया जाता है. इसके लिए न तो किसी निवेश का प्रमाण देना पड़ता है और न ही खर्च के बिल दिखाने होते हैं. यही वजह है कि इसे सबसे आसान टैक्स राहत माना जाता है. एक सीमा बढ़ते ही करदाता की टैक्स देनदारी अपने आप कम हो जाती है.
अब तक कब-कब बढ़ी है सीमा
स्टैंडर्ड डिडक्शन को पहली बार 2018 के बजट में दोबारा लागू किया गया था, जब इसकी सीमा ₹40,000 रखी गई. इसके बाद 2019 में इसे बढ़ाकर ₹50,000 कर दिया गया. इसके बाद से अब तक इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है. यही कारण है कि बजट 2026 में इस पर सबसे ज्यादा नजरें टिकी हुई हैं.
नोट: यह जानकारी पूरी तरह बजट से जुड़ी उम्मीदों और अनुमानों पर आधारित है. अंतिम फैसला केंद्रीय बजट 2026 के ऐलान के बाद ही स्पष्ट होगा.