ईरान-अमेरिका तनाव के बीच 1,613 अंक तक लुढ़का सेंसेक्स, निफ्टी में 495 अंक की गिरावट

आज बाजार खुलते ही अमेरिका-ईरान के बीच शांति वार्ता फेल होने का असर दिखा. शुरुआती कारोबार में भी भारी गिरावट देखने को मिली है. सेंसेक्स 1600 अंक से ज्यादा और निफ्टी 495 अंक तक नीचे आया है.

Pinterest
Shanu Sharma

भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को कारोबार की शुरुआत में ही जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई. मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और असफल शांति वार्ता के कारण निवेशक सतर्क हो गए हैं. सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही सूचकांकों में शुरुआती मिनटों में भारी बिकवाली देखने को मिली.

आज यानी 13 अप्रैल को सेंसेक्स 75,937.16 के स्तर पर खुला और खुलते ही 1,613 अंको की गिरावट देखी गई. इसी तरह निफ्टी 23,589.60 पर खुला और 495 अंकों की गिरावट के साथ 23,555.60 तक लुढ़क गया. इस गिरावट के कारण निवेशकों की दौलत में करीब 7.27 लाख करोड़ रुपये से अधिक की कमी आ गई.

भारतीय बाजार में क्यों आई गिरावट?

भारतीय बाजार में आई इस गिरावट के पीछे अमेरिका और ईरान के बीच असफल शांति वार्ता बताया जा रहा है. पाकिस्तान पहुंचे अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा था 21 घंटो तक चली बातचीत के बाद भी दोनों देशों के बीच वार्ता बेनतीजा रहा. हालांकि ईरानी अधिकारी ने इसके पीछे अमेरिकी पक्ष को जिम्मेदार ठहराया था.

अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रंप सरकार की नौसेना आज से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी शुरू करने जा रही है. इससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है तथा कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई हैं.

पिछले सप्ताह में शेयर बाजार में शानदार प्रदर्शन

पिछले कारोबारी सप्ताह में शेयर बाजार में शानदार प्रदर्शन देखने को मिला था. सेंसेक्स में 4,230.7 अंक यानी 5.77 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई थी, जबकि निफ्टी 1,337.5 अंक यानी 5.88 प्रतिशत ऊपर चढ़ा था. हालांकि आज एशियाई बाजारों में भी भारी गिरावट देखने को मिली है. जापान का निक्केई, दक्षिण कोरिया का कॉस्पी और हांगकांग का हैंग सेंग 1 प्रतिशत से अधिक गिरे हैं. ताइवान वेटेड और शंघाई कंपोजिट भी लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं. कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बीच भारतीय रुपया भी कमजोर हुआ है. 

क्या है विशेषज्ञों की राय?

विश्लेषकों का कहना है कि यदि अमेरिका-ईरान तनाव आगे बढ़ा तो कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं, जिससे भारतीय शेयर बाजार और मुद्रा पर और दबाव पड़ सकता है. निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है. बाजार की आगे की दिशा अब आगामी घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी.