8वें वेतन आयोग की बैठक में इन महत्वपूर्ण मुद्दों पर हुई चर्चा, किन मुद्दों पर बनी बात?
आठवें वेतन आयोग को लेकर आयोजित एनसी-जेसीएम की 49वीं वार्षिक बैठक में केंद्रीय कर्मचारियों की सात प्रमुख मांगों पर गहन चर्चा हुई. इसमें पुरानी पेंशन, फिटमेंट फैक्टर और खाली पदों को भरने जैसे मुद्दे शामिल रहे.
केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और सेवा शर्तों में सुधार को लेकर एक प्रशासनिक हलचल शुरू हो गई है. पिछले सप्ताह आठवें वेतन आयोग की शासकीय संस्था एनसी-जेसीएम की 49वीं वार्षिक बैठक का आयोजन किया गया. इस उच्च स्तरीय बैठक में कर्मचारी संगठनों ने सरकार के समक्ष अपनी सात सूत्रीय मांगों का एक विस्तृत खाका पेश किया. बैठक के दौरान प्रस्तावित वेतनमान, पुरानी पेंशन योजना की बहाली, फिटमेंट फैक्टर में बढ़ोतरी और पदोन्नति नीति जैसे बेहद संवेदनशील मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई.
कर्मचारी पक्ष ने कैबिनेट सचिव को आठवें वेतन आयोग के गठन के संबंध में अपना आधिकारिक मांग पत्र सौंप दिया है. इस ज्ञापन में न्यूनतम शुरुआती वेतन, नए फिटमेंट फैक्टर, वार्षिक वेतन वृद्धि की दर और एक पारदर्शी प्रोमोशन नीति को लेकर ठोस सुझाव दिए गए हैं. इसके अलावा, संगठनों ने कैबिनेट सचिव से आग्रह किया है कि वे केंद्र सरकार पर दबाव बनाएं ताकि नए वेतन आयोग की सेवा शर्तों में मौजूदा पेंशनभोगियों की पेंशन समीक्षा के मुद्दे को भी शामिल किया जा सके.
अदालती मुकदमों और मानद प्रतिनियुक्ति
कर्मचारी संगठनों ने विभिन्न न्यायालयों में सेवा संबंधी लंबित मुकदमों की बढ़ती संख्या पर गहरी चिंता व्यक्त की है. उनका आरोप है कि सरकारी विभाग राष्ट्रीय मुकदमेबाजी नीति का उल्लंघन करते हुए बार-बार अपील दायर करते हैं, जिससे कर्मचारी परेशान होते हैं. इसके अतिरिक्त, अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी संघ के सचिव सी श्रीकुमार ने 41 आयुध कारखानों से बने सात रक्षा उपक्रमों के कर्मचारियों की मानद प्रतिनियुक्ति की अवधि बढ़ाने के लिए जल्द ही नई अधिसूचना जारी करने की मांग की है.
एम्स में स्थानांतरण और मध्यस्थता निर्णय
बैठक में यह गंभीर मुद्दा भी उठा कि अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) द्वारा पति-पत्नी की एक ही स्टेशन पर तैनाती संबंधी डीओपीटी के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया जा रहा है. इस पारिवारिक समस्या के चलते कई महिला कर्मचारियों को अपनी नौकरियां तक छोड़नी पड़ी हैं. कर्मचारियों ने मांग की है कि देश के सभी एम्स अस्पतालों में यह नियम अनिवार्य रूप से लागू हो. साथ ही, वर्षों से अटके मध्यस्थता निर्णयों को भी तुरंत लागू करने का अनुरोध किया गया है.
वेतन वृद्धि नियम में बदलाव की मांग
केंद्रीय सिविल सेवा (संशोधित वेतन) नियम 2016 के नियम 10 में शामिल विसंगतियों पर भी चर्चा हुई. वर्तमान नियम के अनुसार, पदोन्नति के बाद अगली वेतन वृद्धि के लिए छह महीने की निरंतर सेवा अनिवार्य है, जिसमें "डाइस-नॉन" खंड के कारण एक भी दिन की अनुपस्थिति से वेतन वृद्धि टल जाती है. कर्मचारी पक्ष ने इस तकनीकी बाधा को दूर करने और इस छह महीने की कठिन अवधि की जगह सीधे 180 दिनों का मानक नियम तय करने का प्रस्ताव रखा है.
निजीकरण पर रोक और पक्की भर्ती
अंत में, रेलवे जैसे बड़े सार्वजनिक विभागों का उदाहरण देते हुए कहा गया कि नई परियोजनाओं और कार्यभार में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, लेकिन कर्मचारियों की स्वीकृत संख्या कम होती जा रही है. काम के इस अत्यधिक दबाव को कम करने के लिए प्रशासन द्वारा किए जा रहे आउटसोर्सिंग और निजीकरण के प्रयासों का तीखा विरोध किया गया. कर्मचारी नेताओं ने सरकार से मांग की है कि सभी विभागों के रिक्त पड़े पदों को स्थायी भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से तुरंत भरा जाए.