100% एथेनॉल से दौड़ेगी कार! सरकार के इस फैसले से बदल जाएगा सफर का मजा, ये दिग्गज ऑटो कंपनियां भी तैयार

सरकार ने 100% शुद्ध एथेनॉल यानी E100 ईंधन के इस्तेमाल को मंजूरी देकर फ्लेक्स फ्यूल वाहनों के लिए रास्ता खोल दिया है. इस फैसले के बाद मारुति सुजुकी, टोयोटा और हुंडई जैसी कंपनियां एथेनॉल आधारित कारों पर काम तेज कर रही हैं.

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Reepu Kumari

नई दिल्ली: पेट्रोल डीजल की कीमतों के बीच अब देश में कार चलाने का तरीका बदलने की तैयारी है. केंद्र सरकार ने 100% शुद्ध एथेनॉल यानी E100 को वाहनों में ईंधन के तौर पर इस्तेमाल करने से जुड़े नए नियमों को मंजूरी दे दी है. इस फैसले के बाद फ्लेक्स फ्यूल तकनीक वाली कारों का रास्ता साफ हो गया है. माना जा रहा है कि अगले साल से ऑटो कंपनियां ऐसे मॉडल बाजार में पेश कर सकती हैं, जो एथेनॉल आधारित ईंधन पर चलेंगे.

अब तक देश में पेट्रोल के साथ एथेनॉल मिलाने पर ज्यादा जोर दिया जा रहा था. E20 में पेट्रोल के साथ 20% एथेनॉल का मिश्रण होता है. नए नियमों के बाद E100 यानी 100% शुद्ध एथेनॉल को भी वाहनों में इस्तेमाल करने की अनुमति मिल गई है. फ्लेक्स फ्यूल इंजन की खासियत यह होगी कि वाहन केवल एथेनॉल पर ही नहीं, बल्कि पेट्रोल और एथेनॉल के अलग अलग मिश्रण पर भी चल सकेगा. सरकार इसके लिए ईंधन उपलब्धता बढ़ाने पर भी काम कर रही है.

कंपनियों ने शुरू की तैयारी

मारुति सुजुकी पहले ही WagonR का फ्लेक्स फ्यूल प्रोटोटाइप प्रदर्शित कर चुकी है. यह मॉडल 20% से लेकर 85% से ज्यादा एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन पर चल सकता है. अब कंपनी इसे 100% एथेनॉल के अनुकूल बनाने और अगले साल लॉन्च करने की योजना पर काम कर रही है. इससे ग्राहकों के सामने पेट्रोल के अलावा एक नया ईंधन विकल्प उपलब्ध हो सकता है.


टोयोटा भी इस दिशा में पहले कदम उठा चुकी है. कंपनी ने भारत में Innova Hycross का दुनिया का पहला 100% एथेनॉल से चलने वाला प्रोटोटाइप मॉडल पेश किया था. इसमें एथेनॉल इंजन के साथ हाइब्रिड इलेक्ट्रिक तकनीक भी दी गई है. दूसरी ओर, हुंडई भी अपने इंजन को इस तरह अपडेट करने की तैयारी कर रही है कि वे 100% एथेनॉल वाले ईंधन का इस्तेमाल कर सकें.

जेब और पर्यावरण पर कितना असर?

एथेनॉल की कीमत पेट्रोल के मुकाबले कम होने के कारण इसे ईंधन खर्च घटाने वाले विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है. अगर देश में E100 की उपलब्धता बढ़ती है, तो वाहन मालिकों को पेट्रोल के साथ एक दूसरा विकल्प मिल सकता है. इसके अलावा एथेनॉल को अपेक्षाकृत साफ ईंधन माना जाता है, जिससे वाहनों से होने वाले हानिकारक उत्सर्जन को कम करने में मदद मिल सकती है.

भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है. ऐसे में घरेलू स्तर पर एथेनॉल उत्पादन बढ़ने से आयातित तेल पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है. सरकार का लक्ष्य देश के अलग अलग हिस्सों में एथेनॉल ईंधन की उपलब्धता बढ़ाना है. अगर यह व्यवस्था बड़े स्तर पर विकसित होती है, तो आने वाले समय में भारतीय वाहन बाजार में E100 और फ्लेक्स फ्यूल कारों की भूमिका बढ़ सकती है.