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क्यों चार दिशाओं में बनाए गए थे चारधाम और क्या है इनका धार्मिक महत्व?

Chardham Yatra 2024: उत्तराखंड के उत्तराकाशी जिले के यमुनोत्री से छोटे चार धामों की यात्रा की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन देश में जो चार धाम हैं वे चार दिशाओं में मौजूद हैं. इनमें बद्रीनाथ धाम, पुरी जगन्नाथ धाम, रामेश्वरम और द्वारिका धाम आते हैं. असल में यही चार धाम हैं. वहीं, उत्तराखंड में भी यमुनोत्री, गंगोत्री और केदारनाथ व बद्रीनाथ धाम को छोटी चार धाम यात्रा कहा जाता है.

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Chardham Yatra 2024: भारत में कई सारे फेमस मंदिर हैं, जहां पर दर्शन मात्र से जीवन धन्य हो जाता है. हिंदू धर्म में चार धाम माने गए हैं, जो चार अलग-अलग दिशाओं में स्थापित हैं. इनमें दक्षिण दिशा में रामेश्वरम, पूर्व दिशा में पुरी, पश्चिम दिशा में द्वारकापुरी और उत्तर दिशा में ब्रदीनाथ धाम मौजूद हैं. इन चारों धामों के दर्शन से मनुष्य मोक्ष को प्राप्त करता है. 

मान्यता है कि चार धाम व्यक्ति के जीवन की धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की यात्रा हैं. इसी कारण ये चार दिशाओं में विराजमान हैं. वहीं, चार दिशाओं में स्थापित इन चारों धामों के दर्शन के पीछे यह भी लक्ष्य था कि इन धामों के दर्शन करने से व्यक्ति पूरे भारत की संस्कृति का दर्शन कर सकेगा और सभ्यता व परंपराओं से परिचित होगा. ये चारों धाम आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा परिभाषित चार वैष्णव तीर्थ हैं. यहां पर हर हिंदू को अपने जीवन काल में अवश्य ही जाना चाहिए. 

ऐतरेय ब्राह्मण में लिखी है ये बात

ऐतरेय ब्राह्मण के अनुसार जब मनुष्य सोया हुआ होता है तो वह कलयुग में होता है और जब वह बैठा हुआ होता है तो द्वापर व जब वह खड़ा हो जाता है तो त्रेतायुग में होता है. इसके साथ ही जब वह चलने लगता है तो वह सतयुग को प्राप्त करता है. इस कारण चारधाम की यात्रा को सतयुग के तुल्य माना गया है. 

बद्रीनाथ धाम

भारत के उत्तर में अलकनंदा नदी के किनारे यह धाम बसा हुआ है. यह धाम भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित है. यहां अचल ज्ञान ज्योति के प्रतीक के रूप में एक अखंड दीप प्रज्ज्वलित होता रहता है. इस स्थान पर नर और नारायण का पूजन किया जाता है. यह मंदिर 6 माह के लिए खुला रहता है. इसके बाद 6 महीने तक भगवान विष्णु निद्रा मुद्रा में यहां विश्राम करते हैं. 

रामेश्वरम धाम

भारत के दक्षिण में स्थित यह धाम रामनाथपुरम जिले में समुद्र के किनारे बसा हुआ है. यह तीर्थ चारों ओर से हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी जैसे विशाल समुद्र से घिरा हुआ रहता है. यह धाम प्रभु श्रीराम ने स्थापित किया था. यहां भगवान शिव लिंग स्वरूप में विराजमान हैं. 

पुरी धाम 

भारत के पूर्वी इलाके में स्थित यह धाम भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है. यहां भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलराम और बहन सुभद्रा के साथ विराजमान हैं. यहां पर दर्शन मात्र से स्वर्ग जाने का रास्ता खुल जाता है. 

द्वारिका धाम 

भारत के पश्चिम में बसा हुआ यह धाम भी भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है, यह तीर्थ गुजरात के पश्चिमी तट पर स्थित है. मान्यता है कि इस धाम को भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं बसाया था. यहां पर विधि-विधान से भगवान श्रीकृष्ण का पूजन किया जाता है.

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