Chaitra Navratri 2024 : चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 9 अप्रैल से होने वाली है. इस दिन से नवरात्रि व्रत की शुरुआत हो जाती है. इस दिन से साधक नौ दिनों तक माता के निमित्त अखंड ज्योति जलाते हैं. मान्यता है कि अखंड ज्योति जलाने से माता उस घर की स्वयं रक्षा करती हैं और हर दुखों को दूर करती हैं.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अखंड ज्योति जलााने से व्यक्ति की सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं. इसके साथ ही विशेष इच्छाओं की पूर्ति के लिए भी अखंड ज्योति जलाई जाती है. जो भी साधक बिना ज्योति को लगातार 9 दिनों तक बिना बुझाए जलाता है, उसकी सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. इसके साथ ही ऐसे घर पर कभी विपत्ति नहीं आती है.
कुछ लोग पूरे नौ दिनों तक माता के निमित्त अखंड ज्योति जलाते हैं. इसमें लोग पूरे नौ दिनों तक बिना बुझे लगातार ज्योति जलाते हैं. इसे अखंड ज्योति कहते हैं. अगर ये ज्योति लगातार जलती रहती है तो इससे माता रानी की कृपा आप पर बनी रहती है. ज्योति का बुझना अशुभ माना जाता है. अखंड ज्योति को नौ दिनों तक लगातार प्रज्ज्वलित होने दिया जाता है. इससे माता भक्त की हर समस्या को हर लेती हैं.
ज्योति को प्रज्ज्वलित करते समय शुभम 'करोति कल्याणं,आरोग्यं धन संपदाम्,शत्रु बुद्धि विनाशाय,दीपं ज्योति नमोस्तुते'मंत्र का जाप करें. इसके साथ ही ज्योति के दीपक को जौ, चावल या गेहूं की ढेर पर रखा जाता है. इसको सीधे जमीन पर नहीं रखा जाता है. अगर अखंड ज्योति को घी से जलाया गया हो तो उसे अपने दाईं ओर वहीं, अगर तेज से ज्योति जलायी गई है तो उसे अपने बाईं ओर रखना शुभ माना जाता है.
अगर घर में ज्योति जलाई है तो उस कमरे को अकेला नहीं छोड़ा जाता है और न ही घर में ताला लगाना चाहिए. ज्योति को जलाने के लिए टूटे हुए दीपक का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. नौ दिन पूरे होने पर इस दीपक को स्वाभाविक रूप से बुझने देना चाहिए. वहीं, ज्योति की बाती बनाने के लिए आप सवा हाथ के रक्षा सूत्र का इस्तेमाल कर सकते हैं.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ज्योति को बुझने नहीं देना चाहिए. ज्योति का बुझना अशुभ माना जाता है. अगर आप मिट्टी से बने दीपक में अखंड ज्योति जला रहे हैं तो उसे एक दिन पहले ही पानी में भिगोकर रखना चाहिए. इसके बाद ही इसका इस्तेमाल करना चाहिए. एक बार ज्योति जलने के बाद बार-बार उसमें तेल या फिर घी डालते रहें. ज्योति जलाने के लिए जो भी दीपक लें, उसे बड़े आकार का लें. इसके ऊपर आप लैंप वाला शीशा भी रख सकते हैं. अंतिम दिन के बाद जब भी ज्योति बुझ जाए तो इसे पवित्र नदी में प्रवाहित कर दें.
Disclaimer : यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. theindiadaily.com इन मान्यताओं और जानकारियों की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह ले लें.