IPL 2026

पूर्वजों की तस्वीर कहां लगाएं ताकि घर में बनी रहे सुख-शांति और समृद्धि

गरुड़ पुराण और वास्तु मान्यताओं के अनुसार पूर्वजों की तस्वीरों को सम्मानजनक स्थान पर सीमित संख्या में रखना बेहतर माना जाता है.

Pinterest
Km Jaya

नई दिल्ली: सनातन परंपरा में पूर्वजों का सम्मान और स्मरण बहुत महत्वपूर्ण माना गया है. जब कोई प्रियजन इस दुनिया से विदा हो जाता है, तो उसकी यादें अक्सर तस्वीरों के रूप में घर में संजोकर रखी जाती हैं. माना जाता है कि पूर्वजों की तस्वीरें केवल यादों का प्रतीक नहीं होतीं, बल्कि परिवार के भावनात्मक जुड़ाव और श्रद्धा का भी प्रतीक होती हैं. हालांकि धार्मिक ग्रंथों और वास्तु मान्यताओं के अनुसार इन तस्वीरों को घर में सही स्थान पर लगाना जरूरी माना गया है.

गरुड़ पुराण और वास्तु शास्त्र के अनुसार मृत परिजनों या पूर्वजों की तस्वीरें घर की दक्षिण या पश्चिम दिशा की दीवार पर लगाना शुभ माना जाता है. ऐसी स्थिति में तस्वीर का मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर रहता है. धार्मिक मान्यताओं में उत्तर और पूर्व दिशा को सकारात्मक ऊर्जा और देवताओं की दिशा माना गया है. इसलिए इस दिशा में तस्वीर लगाने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होने और घर में सुख-शांति बनी रहने की मान्यता है.

शास्त्रों में क्या बताया गया है?

शास्त्रों में कुछ स्थान ऐसे भी बताए गए हैं जहां पूर्वजों की तस्वीरें नहीं लगानी चाहिए. मंदिर या पूजा घर में मृत परिजनों की तस्वीर रखना उचित नहीं माना गया है. मान्यता है कि पूर्वज सम्माननीय होते हैं, लेकिन उन्हें देवी-देवताओं के समान स्थान नहीं दिया जाना चाहिए. इसी कारण उनकी तस्वीरें भगवान की मूर्तियों या चित्रों के साथ नहीं रखी जातीं.


इसके अलावा घर की सीढ़ियों के पास, कमरों के कोनों या बार-बार उपयोग होने वाली जगहों पर भी ऐसी तस्वीरें लगाने से बचने की सलाह दी जाती है. माना जाता है कि इससे व्यक्ति बार-बार अतीत की यादों में उलझा रह सकता है. जीवित व्यक्तियों की तस्वीरों के साथ मृत परिजनों की तस्वीर एक ही फ्रेम में लगाना भी शास्त्रीय दृष्टि से उचित नहीं माना जाता.

और कहां नहीं लगानी चाहिए तस्वीरें?

घर के मध्य भाग, जिसे ब्रह्मस्थान कहा जाता है, वहां भी पूर्वजों की तस्वीरें नहीं लगानी चाहिए. इसके अलावा रसोईघर में ऐसी तस्वीरें लगाने से भी बचने की सलाह दी जाती है. कुछ मान्यताओं के अनुसार इससे पारिवारिक तनाव और आर्थिक परेशानियां बढ़ सकती हैं.

विशेषज्ञों के अनुसार पूर्वजों की तस्वीरें सीमित संख्या में और सम्मानजनक स्थान पर रखनी चाहिए. यदि संभव हो तो तस्वीरों को दीवार पर टांगने के बजाय किसी शेल्फ या स्टैंड पर रखा जा सकता है. साथ ही ऐसी तस्वीरों का चयन करना बेहतर माना जाता है जिनमें व्यक्ति मुस्कुराता हुआ दिखाई दे.

धार्मिक मान्यताओं का उद्देश्य भय पैदा करना नहीं बल्कि श्रद्धा और संतुलन बनाए रखना है. इसलिए पूर्वजों का सम्मान करते हुए उनकी तस्वीरों को उचित स्थान पर रखना ही सबसे अच्छा माना जाता है.