अगस्त के महीने में दो अलग खगोलीय घटनाएं घटने वाली है. पहली घटना 12 अगस्त को होगा.इस दिन पूर्ण सूर्यग्रहण लगने वाला है. इसके बाद .इसके बाद 28 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन आंशिक चंद्रग्रहण लगने वाला है.
हालांकि, इन दोनों ग्रहणों को भारत के किसी भी हिस्से से नहीं देखा जा सकेगा. ज्योतिषाचार्य की मानें तो ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देने के कारण यहां इनका धार्मिक प्रभाव नहीं माना जाएगा.
ज्योतिषाचार्य के मुताबिक, वैदिक मान्यताओं में ग्रहण के धार्मिक नियम तभी लागू माने जाते हैं, जब ग्रहण किसी स्थान पर दिखाई दे. चूंकि अगस्त में पड़ने वाले दोनों ग्रहण भारत से दृश्यमान नहीं होंगे, इसलिए यहां सूतक काल भी मान्य नहीं होगा. इसका मतलब है कि मंदिरों के कपाट बंद करने की जरूरत नहीं होगी. लोग सामान्य दिनों की तरह पूजा-पाठ, धार्मिक अनुष्ठान और दान आदि कर सकेंगे. इन कार्यों को करने से किसी तरह का धार्मिक दोष नहीं माना जाएगा.
28 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन आंशिक चंद्रग्रहण पड़ रहा है. इसके बावजूद भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देने के कारण पर्व पर इसका कोई धार्मिक प्रतिबंध नहीं रहेगा. बहनें पूरे दिन अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकेंगी. इसके अलावा, भारत में सूतक काल लागू नहीं होने से रक्षाबंधन मनाने में किसी तरह की बाधा नहीं आएगी. लोग सामान्य तरीके से पूजा और अन्य परंपराएं निभा सकेंगे.
ज्योतिषाचार्य के अनुसार, 2 अगस्त 2027 को पड़ने वाला खंडग्रास सूर्यग्रहण भारत के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा. इसके चलते उस समय भारत में सूतक काल से जुड़े धार्मिक नियम लागू होंगे. मान्यताओं के अनुसार सूर्यग्रहण से पहले चार प्रहर यानी करीब 12 घंटे और चंद्रग्रहण से पहले तीन प्रहर यानी करीब 9 घंटे का सूतक माना जाता है. इस दौरान भोजन नहीं करने की परंपरा बताई गई है. हालांकि बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को इस नियम से छूट दी जाती है.