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किसी के पास ऐरावत, किसी के पास मोर लेकिन भगवान गणेश क्यों करते हैं चूहे की सवारी? दिल छू लेगी ये कहानी

Lord Ganesha Mouse Story: हिंदू धर्म में भगवान गणेश की सबसे पहले पूजा की जाती है. क्योंकि ऐसा कहा जाता है कि पहले गणेश की पूजा करने से किसी भी काम को बिना मुश्किल से पूरा होता है. इसी वजह से उन्हें विघ्नहर्ता कहा जाता है. लेकिन क्या आपको पता है भगवान गणेश चूहे की सवारी क्यों करते हैं. इसके पीछे की वजह से जुड़ी एक खास कथा है आइए जानते हैं इसके बारे में.

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किसी के पास ऐरावत, किसी के पास मोर लेकिन भगवान गणेश क्यों करते हैं चूहे की सवारी? दिल छू लेगी ये कहानी
Courtesy: Pinterest

Lord Ganesha: हिंदू धर्म में कोई भी पूजा शुरू होने से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है. ऐसा माना जाता है कि किसी भी मांगलिक कार्य शुरुआत से पहले अगर गणेश जी की पूजा करते हैं तो काम आसानी से पूरा होता है. इसलिए उन्हें विघ्नहर्ता कहा जाता है. लेकिन जिस तरह से मां दुर्गा शेर की सवारी करती हैं और भगवान शिव के वाहन नंदी हैं वैसे ही गणेश जी ने अपने वाहन को मूषक यानी चूहे को चुना है. 

क्या आपने कभी सोचा है भगवान गणेश ने अपना वाहन के रूप में छोटे जीव को क्यों चुना है. आइए जानते हैं इसके पीछे का क्या कारण है. एक प्रचलित कथा के अनुसार, भगवान इंद्र देव ने एक बार सभा के सभी मुनियों को बुलाया. इंद्र देव ने इस सभा में ‘क्रोंच’ को भी बुलाया था. सभा में ‘क्रोंच’अप्सराओं के साथ हंसी मजाक करने में व्यस्त था. इसी दौरान मुनि वामदेव के ऊपर पैर रख दिया. मुनि वामदेव क्रोधित हो गए और क्रौंच को चूहा बनने का श्राप दिया. क्रोंच ने मुनि से माफी मांगी लेकिन फिर भी उन्होंने श्राप वापिस नहीं लिया. 

चूहे ने ऋषि को किया परेशान

श्राप वापस न लेने पर मुनि ने उन्हें एक वरदान दिया कि वह भगवान गणेश के सवारी बनेंगे. क्रौंच दिखने में काफी विशाल चूहा था. क्रौंच ने वन में रहने वाले ऋषि-मुनियों को खूब परेशान कर रखा था. एक बार कुटिया में ऋषि पराशर भगवान श्री गणेश जी का ध्यान कर रहे थे. वहीं, ऋषि कुटिया के बाहर चूहे को भगाने की कोशिश कर रहे हैं थे लेकिन फिर भी वह सफल नहीं हो पाए और कुटिया को तहस-नहस कर दिया. इन सबसे परेशान होकर ऋषि भगवान शिव के पास समाधान के लिए गए. 

गणेश जी ने तोड़ा घमंड

गणेश जी ने चूहे को पकड़ने के लिए फंदा फेंका. इस फंदे ने चूहे को पकड़ने के लिए पाताल लोक तक पीछा किया. फंदे ने चूहे को पकड़कर गणेश जी के सामने ले आया. जब भगवान गणेश ने तहस-नहस की वजह पूछी तो कोई जवाब नहीं दिया. गणेश जी ने चूहा को कहा कि तुम मेरे आश्रय हो तुम्हें जो चाहिए वो मांग लो लेकिन तुम कभी महर्षि को तंग नहीं करोगे. इस पर चूहा जवाब देता है मुझे कुछ नहीं चाहिए लेकिन आपको कुछ चाहिए तो बता दो. 

चूहे ने मांगी माफी

चूहे के घमंड को देखकर भगवान गणेश ने उसकी सवारी करने के लिए कहा. जब चूहे पर गणेश जी बैठे तो वह उनके वजन से दबाने लगा. चूहे ने काफी कोशिश की लेकिन वह आगे बढ़ नहीं पाया.  इसके बाद चूहे ने बोला गणपति बप्पा मुझे माफ कर दें. आपके वजन में दब रहा हूं. यह सूनने के बाद गणेश जी ने अपना वजन कम किया. इस तरह से मूषक यानी चूहा गणेश जी की सवारी बन गए. 

Disclaimer: यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है.  theindiadaily.com  इन मान्यताओं और जानकारियों की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह ले लें.