काशी में साल में सिर्फ एक दिन खुलते हैं भगवान धन्वंतरि के कपाट, 325 साल पुरानी है अनोखी परंपरा
वाराणसी के सुड़िया इलाके में भगवान धन्वंतरि की करीब 325 साल पुरानी अष्टधातु प्रतिमा स्थापित है. इसके दर्शन साल में केवल धनतेरस के दिन किए जा सकते हैं.
धर्म और आध्यात्म की नगरी काशी अपनी अनोखी परंपराओं के लिए जानी जाती है. यहां धनतेरस का पर्व सिर्फ सोने-चांदी और बर्तन खरीदने तक सीमित नहीं है. वाराणसी में भगवान धन्वंतरि का एक ऐसा विशेष दरबार भी है, जिसके कपाट साल में केवल एक दिन खोले जाते हैं. धनतेरस के अवसर पर श्रद्धालुओं को यहां दर्शन का मौका मिलता है.
325 साल पुरानी है अष्टधातु की प्रतिमा
वाराणसी के ऐतिहासिक चौक क्षेत्र के सुड़िया इलाके में राजवैद्य परिवार के प्रांगण में भगवान धन्वंतरि की प्राचीन प्रतिमा स्थापित है. बताया जाता है कि यह प्रतिमा करीब 325 साल पुरानी है और अष्टधातु से बनी हुई है. इसमें भगवान धन्वंतरि के हाथों में अमृत कलश दिखाई देता है.
यह स्थान किसी आम सार्वजनिक मंदिर की तरह नहीं है, बल्कि राजवैद्य परिवार की पुरानी परंपरा से जुड़ा हुआ है. इसी वजह से यहां सामान्य दिनों में दर्शन नहीं होते. धनतेरस की शाम को कुछ निश्चित घंटों के लिए इसके कपाट खोले जाते हैं. इस खास अवसर पर दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं.
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दर्शन से आरोग्य मिलने की मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान धन्वंतरि समुद्र मंथन के दौरान प्रकट हुए थे. उन्हें आयुर्वेद और चिकित्सा का देवता माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि धनतेरस के दिन सच्चे मन से उनके दर्शन करने वाले भक्त और उनके परिवार को पूरे साल अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है.
दर्शन के दौरान भगवान धन्वंतरि की प्रतिमा का विशेष श्रृंगार किया जाता है. इसमें हिमालय की दुर्लभ जड़ी-बूटियों और सुगंधित फूलों का इस्तेमाल होता है. दर्शन के बाद श्रद्धालुओं को औषधीय प्रसाद भी दिया जाता है. भक्त इसे पवित्र और गुणकारी मानते हैं. मान्यता है कि भगवान के दर्शन से शारीरिक और मानसिक कष्ट दूर होते हैं.
स्वास्थ्य को सबसे बड़ा धन मानने की परंपरा
धनतेरस पर काशी की यह परंपरा स्वास्थ्य के महत्व को भी याद दिलाती है. आमतौर पर इस दिन लोग सोना, चांदी और बर्तन खरीदकर समृद्धि की कामना करते हैं, लेकिन भगवान धन्वंतरि की पूजा का संबंध अच्छे स्वास्थ्य और निरोगी जीवन से भी है. इस परंपरा के अनुसार, धन-दौलत के साथ स्वस्थ शरीर और मन भी जीवन की सबसे बड़ी पूंजी हैं.