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Sawan 2024: दुर्लभ संयोग में होगा सावन का आगाज, जानिए इस बार कुल कितने पड़ेंगे सोमवार?

​​​​​​​Sawan 2024: सावन का महीना भगवान भोलेनाथ को समर्पित होता है. इस महीने में भगवान शिव का पूजन बेहद ही फलदायी होता है. इस महीने में लोग भगवान शिव का जल से अभिषेक करते हैं. सावन के महीने में पड़ने वाले सोमवर काफी शुभ माने जाते हैं. इस कारण इन सोमवारों को व्रत रखने से भगवान शिव हर मनोकामना पूरी करते हैं. इस महीने में रुद्राभिषेक काफी शुभ माना जाता है.

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Sawan 2024: दुर्लभ संयोग में होगा सावन का आगाज, जानिए इस बार कुल कितने पड़ेंगे सोमवार?
Courtesy: pexels

Sawan 2024: सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित होता है. सावन के महीने में माता पार्वती और भगवान शिव का पूजन किया जाता है. यह महीना भगवान शिव को बेहद ही प्रिय होता है. इस साल श्रावण माह की प्रतिपदा तिथि सोमवार के दिन ही लगेगी. इस कारण सोमवार से ही सावन माह की शुरुआत होगी. सावन माह की शुरुआत बेहद ही शुभ संयोग में होने जा रही है. इस महीने में रुद्राभिषेक काफी शुभ फलदायी होता है. 

साल 2024 में सावन की शुरुआत प्रीति, आयुष्मान, और सर्वार्थसिद्धि योग के संयोग पर होने जा रही है. इस शुभ योग में भोलेनाथ की पूजा करने से कई गुना अधिक शुभ फलों की प्राप्ति होगी. हिंदू पंचांग में प्रीति योग सुबह से लेकर शाम 5 बजकर 58 तक रहने वाला है. इसके बाद आयुष्मान योग लग जाएगा. इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 5 बजकर 57 मिनट से शुरू होगा और रात 10 बजकर 21 मिनट तक रहेगा. 

कब से शुरू है सावन?

साल 2024 में सावन का महीना श्रावण माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि 21 जुलाई की दोपहर 3 बजकर 47 मिनट से हो रही है. यह 22 जुलाई की दोपहर 1 बजकर 11 मिनट तक रहने वाली है. उदया तिथि के चलते सावन माह की शुरुआत 22 जुलाई दिन सोमवार से मानी जाएगी. इस सावन माह का समापन भी 19 अगस्त सोमवार को हो जाएगा. 

पड़ेंगे इतने सोमवार

साल 2024 में कुल 5 सोमवार पड़ेंगे. इसमें से पहला सोमवार 22 जुलाई को पड़ेगा. दूसरा सोमवार 29 जुलाई और सावन का तीसरा सोमवार 5 अगस्त को पड़ेगा. सावन का चौथा सोमवार 12 अगस्त और पांचवां सोमवार 19 अगस्त को पड़ने वाला है. 

सावन माह का क्या है महत्व? 

हिंदू धर्म में सावन का महीना बेहद खास माना जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार आषाढ़ माह के शुक्लपक्ष की एकादशी तिथि के दिन भगवान विष्णु चार माह के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं. इस दौरान सृष्टि का पूरा कार्यभार भगवान शिव के हाथों में आ जाता है. सावन के महीने में भी भगवान शिव ने समुद्र मंथन के दौरान निकलने वाला हलाहल विष भी इस महीने में पिया था. इस कारण सावन के महीने में भगवान शिव का जल और दूध से अभिषेक करते हैं. भगवान शिव इस माह में जल चढ़ाने वाले भक्तों से अति प्रसन्न होते हैं. इस कारण ही इस माह में कांवड़ यात्रा निकाली जाती है.

Disclaimer : यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है.  theindiadaily.com  इन मान्यताओं और जानकारियों की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह ले लें.