हर 20 साल में बढ़ रही नंदी की रहस्यमयी मूर्ति! क्या सच में महाप्रलय का समय करीब है? जानिए पूरी कहानी

हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आंध्र प्रदेश के कुरनूल स्थित उमा महेश्वरी मंदिर में स्थापित नंदी देव की एक प्रतिमा का आकार समय के साथ बढ़ रहा है.

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Reepu Kumari

नई दिल्ली: कलयुग के अंत और महाप्रलय को लेकर हिंदू धर्म में कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं. इन्हीं में से एक मान्यता आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले में स्थित उमा महेश्वरी मंदिर से जुड़ी है. यहां स्थापित नंदी देव की एक प्रतिमा को लेकर कहा जाता है कि उसका आकार लगातार बढ़ रहा है. इसी वजह से यह मंदिर वर्षों से श्रद्धालुओं और शोधकर्ताओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, नंदी देव की यह प्रतिमा भविष्य में होने वाली महाप्रलय का संकेत देती है. वहीं वैज्ञानिक इस बदलाव को प्रतिमा में इस्तेमाल हुए विशेष प्रकार के पत्थर का प्राकृतिक गुण बताते हैं. आस्था और विज्ञान के अलग-अलग दृष्टिकोण इस रहस्य को और भी रोचक बना देते हैं.

हर 20 साल में बढ़ने की है धार्मिक मान्यता

उमा महेश्वरी मंदिर में स्थापित नंदी देव की प्रतिमा के बारे में मान्यता है कि इसका आकार हर 20 वर्ष में लगभग एक इंच बढ़ता है. कहा जाता है कि पहले श्रद्धालु इसकी आसानी से परिक्रमा कर लेते थे, लेकिन अब प्रतिमा पहले से बड़ी हो चुकी है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, प्रतिमा के बढ़ते आकार के कारण मंदिर के कुछ स्तंभों में दरारें भी दिखाई देने लगी हैं.

महाप्रलय से जुड़ी है यह धार्मिक मान्यता

धार्मिक विश्वास के अनुसार, कलयुग के अंतिम समय में यह प्रतिमा सजीव हो जाएगी और नंदी देव स्वयं प्रकट होंगे. इसी घटना को महाप्रलय से जोड़ा जाता है. हालांकि, यह पूरी तरह धार्मिक मान्यता है और इसके होने का कोई निश्चित समय या प्रमाण उपलब्ध नहीं है. श्रद्धालु इसे आस्था का विषय मानते हैं.


वैज्ञानिकों की क्या है राय?

प्रतिमा को लेकर वैज्ञानिकों ने भी समय-समय पर अध्ययन किया है. उनके अनुसार, यह मूर्ति संभवतः ऐसे पत्थर से बनी है, जिसकी संरचना समय के साथ फैल सकती है. इसी कारण प्रतिमा के आकार में धीरे-धीरे बदलाव दिखाई देता है. हालांकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस पर कोई अंतिम वैज्ञानिक निष्कर्ष घोषित नहीं किया गया है.

पुष्करणी कुंड और कौवों से जुड़ी मान्यताएं भी चर्चा में

मंदिर परिसर में स्थित पुष्करणी कुंड को लेकर भी कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं. कहा जाता है कि नंदी जी के मुख से इस कुंड में लगातार जल गिरता रहता है, लेकिन इसका स्रोत स्पष्ट नहीं माना जाता. इसी तरह यह भी मान्यता है कि ऋषि अगस्त्य के श्राप के कारण मंदिर परिसर में कौवे प्रवेश नहीं करते. ये सभी बातें धार्मिक परंपराओं का हिस्सा मानी जाती हैं.

गुजरात के शिवलिंग से भी जुड़ी है ऐसी ही मान्यता

धार्मिक मान्यताओं में गुजरात के मृदेश्वर मंदिर के एक शिवलिंग का भी उल्लेख मिलता है. मान्यता है कि उसका आकार भी धीरे-धीरे बढ़ रहा है और इसे कलयुग से जोड़कर देखा जाता है. कहा जाता है कि शिवलिंग हर वर्ष चावल के दाने जितना बढ़ता है. साथ ही उससे निकलने वाली जलधारा को भी श्रद्धालु विशेष महत्व देते हैं. इन मान्यताओं को लेकर वैज्ञानिक और धार्मिक दृष्टिकोण अलग-अलग हैं.

नोट: यहां दी गई जानकारी पौराणिक मान्यताओं पर आधारित है. हमारा चैनल इसकी पुष्टि नहीं करता है.