Garud Puran: क्या घर में नहीं रखा जाता यमुना जल? यमलोक और मृत्यु से है संबंध, शास्त्रों में छिपा है जवाब

यमुनाजी का संबंध यमराज से होने के कारण इसे घर में रखने से मना किया गया है. यह माना जाता है कि यमुना जल से घर में नकारात्मक ऊर्जा और मृत्यु की छाया आ सकती है.

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Reepu Kumari

Garud Puran: हमारे धार्मिक ग्रंथों में गंगा और यमुना को मां का दर्जा दिया गया है. जहां गंगाजल को घर में रखने और पूजा में इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है, वहीं यमुना जल को घर में नहीं रखने की परंपरा है. यह सुनकर थोड़ा अजीब लग सकता है कि एक पवित्र नदी का जल घर में क्यों वर्जित माना गया है?

दरअसल, इसके पीछे केवल परंपरा नहीं, बल्कि गहरे धार्मिक और आध्यात्मिक कारण छिपे हुए हैं. यमुना जी का सीधा संबंध यमराज यानी मृत्यु के देवता से है. यही कारण है कि शास्त्रों और पुराणों में इसे घर की शुद्धता के लिए उचित नहीं माना गया है. आइए जानते हैं इस परंपरा के पीछे के रहस्य.

कौन हैं यमुना देवी और क्या है उनका महत्व?

शास्त्रों के अनुसार यमुना देवी सूर्य देव की पुत्री और यमराज की बहन हैं. उन्हें कालिंदी भी कहा जाता है. भाई दूज पर यमराज अपनी बहन यमुनाजी के घर जाते हैं और उन्हें यह वरदान देते हैं कि जो भाई-बहन इस दिन यमुना जल से स्नान करेंगे, भाई की अकाल मृत्यु नहीं होगी. इससे पता चलता है कि यमुना का संबंध जीवन और मृत्यु से जुड़ा है.

यमराज से जुड़ाव: मृत्यु का प्रतीक बनाता है यमुना जल

यमुनाजी का संबंध यमराज से होने के कारण इसे घर में रखने से मना किया गया है. यह माना जाता है कि यमुना जल से घर में नकारात्मक ऊर्जा और मृत्यु की छाया आ सकती है. इसलिए इसका उपयोग सिर्फ पूजा, व्रत, या तीर्थ स्नान तक सीमित रहता है, जबकि गंगाजल को जीवनदायिनी और शुभ माना जाता है.

गरुड़ पुराण और पौराणिक संकेत

गरुड़ पुराण और पद्म पुराण में भी साफ कहा गया है कि यमुना जल का स्थायी संग्रह घर में नहीं करना चाहिए. यह जल प्रायश्चित, तीर्थ और विशेष धार्मिक कार्यों में ही उपयोग योग्य है. ऐसा करने से घर में रोग, कलह या असमय मृत्यु जैसे संकट उत्पन्न हो सकते हैं.

श्रीकृष्ण और यमुना जी का दिव्य नाता

कथा है कि जब श्रीकृष्ण का जन्म हुआ और वासुदेव उन्हें मथुरा से गोकुल ले जा रहे थे, तो यमुना ने उन्हें रास्ता दिया. बालकृष्ण के चरण स्पर्श से यमुना और भी पवित्र हो गईं. श्रीकृष्ण की लीलाओं का केंद्र भी यमुना तट ही रहा. फिर भी, यह दिव्यता यमुना जल को घर में रखने योग्य नहीं बनाती, क्योंकि इनका संबंध यमलोक से है.

वास्तु शास्त्र: क्यों है यमुना जल निषेध?

वास्तु शास्त्र में यमुना जल को कालेपन, अस्थिरता और मानसिक अशांति का प्रतीक माना गया है. इससे घर में दरिद्रता, कलह और तनाव बढ़ सकता है. इसके उलट, गंगाजल को शुद्धता, सुख-शांति और समृद्धि देने वाला बताया गया है, जिसे घर में रखने से पुण्य की प्राप्ति होती है.

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. इंडिया डेली इसकी पुष्टि नहीं करता है.