जानें तीज व्रत पारण करने की सही विधि और शुभ मुहूर्त


Shanu Sharma
14 Sep 2026

हरतालिका तीज का महत्व

    हरतालिका तीज भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित पर्व है. भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया को महिलाएं सुखी वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना से यह व्रत रखती हैं. इस बार यह व्रत आज रखा जा रहा है.

कब होगा व्रत का पारण?

    हरतालिका तीज व्रत का पारण 15 सितंबर 2026 को किया जाएगा. धार्मिक मान्यता के अनुसार, सूर्योदय के बाद पूजा-पाठ पूरा करने के बाद ही व्रत खोलना चाहिए.

सुबह उठकर करें ये काम

    पारण वाले दिन सूर्योदय से पहले उठकर घर और पूजा स्थल की सफाई करें. इसके बाद स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें और भगवान शिव तथा माता पार्वती की पूजा करें.

पूजा की सामग्री से जुड़ी विधि

    पूजा के दौरान माता पार्वती को चढ़ाए गए सिंदूर को महिलाएं अपनी मांग में लगा सकती हैं. भगवान शिव और माता पार्वती को अर्पित की गई पूजा सामग्री को हल्के से हटाने के बाद मूर्तियों का सूर्योदय से पहले विसर्जन करने की परंपरा बताई गई है.

कैसे खोलें व्रत?

    विसर्जन के बाद व्रत खोलने से पहले घर के बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लें. इसके बाद पूजा में चढ़ाए गए प्रसाद जैसे काले चने, गुड़ या मिठाई और गंगाजल से व्रत खोलना शुभ माना जाता है.

पारण में नमक से बचें

    हरतालिका तीज के व्रत का पारण करते समय नमक वाली चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए. मान्यता के अनुसार, पूजा में भगवान को चढ़ाए गए भोग से व्रत खोलना शुभ होता है.

अग्निदेव को भोग लगाएं

    व्रत खोलने से पहले अग्निदेव को भोग अर्पित करने की भी परंपरा है. इसके बाद अपनी सामर्थ्य के अनुसार ब्राह्मण या किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दान देना शुभ माना जाता है.

पारण का शुभ समय

    15 सितंबर को सूर्योदय करीब सुबह 5:54 बजे होने की जानकारी दी गई है. सूर्योदय के बाद पूजा की प्रक्रिया पूरी करके व्रत का पारण किया जा सकता है

हरतालिका तीज के जरूरी नियम

    मान्यता है कि इस व्रत में ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए. महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं और हाथों में मेहंदी लगाना शुभ माना जाता है. व्रत के अगले दिन पारण के समय जल ग्रहण करना भी जरूरी माना जाता है.

रात में जागरण का महत्व

    हरतालिका तीज पर रात्रि जागरण को भी विशेष शुभ माना गया है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करते हुए रात में जागरण करने से व्रत का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है.

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