क्या पूजा में बजाया जाने वाला शंख कभी जीवित था? जानिए इसके पीछे का वैज्ञानिक सच

पूजा में उपयोग होने वाला शंख कभी एक जीवित समुद्री घोंघे का कठोर बाहरी खोल था. जीव की मृत्यु के बाद उसका खोल समुद्र में रह जाता है, जिसे लोग धार्मिक, सजावटी और अन्य उपयोगों के लिए एकत्र करते हैं.

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Km Jaya

नई दिल्ली: पूजा, धार्मिक अनुष्ठानों और मंदिरों में उपयोग होने वाला शंख केवल समुद्र से मिला एक सुंदर खोल नहीं होता, बल्कि यह कभी एक जीवित समुद्री जीव का घर हुआ करता था. वैज्ञानिक दृष्टि से शंख एक समुद्री घोंघे का कठोर बाहरी खोल है. यह जीव गैस्ट्रोपोडा वर्ग का सदस्य होता है और समुद्र के गर्म तथा उथले क्षेत्रों में पाया जाता है.

जब यह समुद्री जीव जीवित होता है, तब उसका नरम शरीर पूरी तरह शंख के अंदर सुरक्षित रहता है. आवश्यकता पड़ने पर वह अपने शरीर का एक हिस्सा बाहर निकालकर समुद्र की रेत और चट्टानों पर धीरे धीरे चलता है. किसी खतरे का आभास होने पर वह तुरंत अपने पूरे शरीर को वापस खोल के अंदर समेट लेता है. जीव की मृत्यु के बाद उसका मुलायम शरीर नष्ट हो जाता है और केवल कठोर खोल बचता है, जिसे बाद में समुद्र तटों से एकत्र किया जाता है.

शंख की प्रसिद्ध प्रजाति?

दुनिया में शंख की अनेक प्रजातियां पाई जाती हैं. इनमें क्वीन कॉन्क सबसे प्रसिद्ध मानी जाती है, जो कैरेबियन सागर, बहामास, फ्लोरिडा और ब्राजील के समुद्री क्षेत्रों में मिलती है. इसका खोल बड़ा, मजबूत और आकर्षक होता है. कुछ प्रजातियों के शंखों पर कांटेदार उभार होते हैं, जिन्हें स्पाइडर कॉन्क कहा जाता है.


अन्य देशों में क्या स्थिति?

कई देशों में शंख के भीतर रहने वाले जीव का मांस भोजन के रूप में भी खाया जाता है. विशेष रूप से कैरेबियन क्षेत्र में इसे लोकप्रिय समुद्री भोजन माना जाता है. हालांकि अत्यधिक शिकार के कारण कई स्थानों पर इनकी संख्या कम हो गई है, इसलिए इनके संरक्षण और नियंत्रित पालन पर भी काम किया जा रहा है.

यह समुद्री जीव मुख्य रूप से समुद्र की तलहटी पर उगने वाले शैवाल और छोटे समुद्री पौधों को खाता है. इस कारण यह समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है. वहीं समुद्र में कछुए, शार्क, केकड़े और कुछ अन्य समुद्री जीव इनका शिकार भी करते हैं.

कैसे होते हैं विकसित?

एक मादा शंख लाखों अंडे देती है. उनसे निकले लार्वा कुछ समय तक समुद्री धाराओं के साथ बहते हैं और बाद में समुद्र की तलहटी पर बसकर विकसित होते हैं. इन्हें पूरी तरह वयस्क बनने में लगभग पांच वर्ष लगते हैं. सामान्य परिस्थितियों में इनकी औसत आयु करीब सात वर्ष होती है, जबकि अनुकूल वातावरण में कुछ शंख 20 से 30 वर्ष तक जीवित रह सकते हैं.

कुछ प्रजातियों के शंख प्राकृतिक मोती भी बनाते हैं. विशेष रूप से गुलाबी कॉन्क पर्ल दुनिया के सबसे दुर्लभ और मूल्यवान प्राकृतिक मोतियों में गिने जाते हैं. इसलिए शंख केवल धार्मिक महत्व ही नहीं, बल्कि जैविक और समुद्री विज्ञान की दृष्टि से भी बेहद रोचक जीवों में शामिल है.

Disclaimer: यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. theindiadaily.com इन जानकारियों की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह ले लें.