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बसंत पंचमी 2026 कब है? जानिए सही तारीख और सरस्वती वंदना के बारे में

ज्ञान और बुद्धि की देवी सरस्वती के सम्मान में बसंत पंचमी 2026 23 जनवरी को मनाई जाएगी. शुभ तिथि और समय जानें और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए सरस्वती वंदना का पाठ करें.

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Edited By: Reepu Kumari
बसंत पंचमी 2026 कब है? जानिए सही तारीख और सरस्वती वंदना के बारे में
Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: बसंत पंचमी माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है. पश्चिम बंगाल में बसंत पंचमी को श्री पंचमी और सरस्वती पूजा के नाम से जाना जाता है. यह उल्लेखनीय है कि दक्षिण भारत में प्रचलित शरद नवरात्रि के दौरान भी सरस्वती पूजा की जाती है. इस वर्ष बसंत पंचमी 23 जनवरी को मनाई जाएगी. इसे देवी सरस्वती के जन्मदिवस के रूप में भी मनाया जाता है.

वेबसाइट द्रिक पंचांग के अनुसार 'इस दिन, हिंदू धर्म के अनुसार दिन के मध्यांतर काल से पहले देवी सरस्वती की पूजा की जाती है. यह दिन विद्या आरंभ के लिए महत्वपूर्ण है, जो छोटे बच्चों को शिक्षा और औपचारिक शिक्षा की दुनिया से परिचित कराने की एक रस्म है.

वर्ष 2026 में बसंत पंचमी कब है?

तिथि प्रारंभ : 23 जनवरी, सुबह 2:28 बजे

तिथि समाप्त : 24 जनवरी, रात्रि 1 बजकर 46 मिनट तक

पूजा मुहूर्त : सुबह 7:13 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक

ब्रह्म मुहूर्त : प्रातः 5:26 से प्रातः 6:26 तक

विजय मुहूर्त : दोपहर 2:20 से 3:02 बजे तक

गोधूलि मुहूर्त : शाम 5:50 बजे से शाम 6:17 बजे तक

अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 12:12 बजे से 12:54 बजे तक

सरस्वती वंदना

या कुन्देन्दु तुषाराहारा धवला या शुभ्रा वस्त्रवृता

या वीणा वरदंड मंडितकारा या श्वेत पद्मासना

या ब्रह्मच्युत शंकरा प्रभृतिभिर देवैः सदा पूजिता

सा मम पत्तु सरवति भगवति निःशेष जाद्यपहा॥

सरस्वती वंदना एक्सटेंशन

शुक्लं ब्रह्मविचार सारा, परममाद्यं जगद्व्यापिनीम

वीणा पुस्तका धारिणीम भयदं जड्यन्धकारापहम्.

हस्ते स्फटिकमालिकां विदधातिं पद्मासने संस्थितम्

वन्दे तं परमेश्वरीम भगवतिं बुद्धिप्रदं शरदम्॥

सरस्वती पूजा के बारे में 

सरस्वती पूजा, जिसे वसंत पंचमी भी कहते हैं, ज्ञान, संगीत, कला और बुद्धि की देवी (मां सरस्वती) का त्योहार है. यह माघ महीने के पांचवें दिन मनाया जाता है, जो वसंत के आने का प्रतीक है. भक्त पीले कपड़े पहनते हैं, फूल चढ़ाते हैं, उनकी मूर्ति के सामने किताबें और इंस्ट्रूमेंट रखते हैं, और सीखने और क्रिएटिविटी के लिए आशीर्वाद मांगते हैं. कई स्कूल इस शुभ दिन पर बच्चों के लिए अल्फाबेट (हाते खोरी) की क्लास भी शुरू करते हैं.

डिस्क्लेमर: यह लेख प्रचलित मान्यताओं पर आधारित है. इंडिया डेली यहां दी गई जानकारी और तथ्यों की सटीकता या पूर्णता के लिए जिम्मेदार नहीं है.