नई दिल्ली: देशभर में आज होली का रंगीन उत्सव छाया हुआ है. चैत्र महीने की शुरुआत में मनाया जाने वाला यह त्योहार मौसम के बदलाव का संकेत देता है. सर्दी की उदासी और थकान को दूर कर वसंत की खुशियां लाता है. रंग-गुलाल, संगीत, नाच-गाना और दोस्तों-परिवार के साथ गले मिलना सब कुछ नकारात्मकता को मिटाता है. अलग-अलग रंग मन की स्थिति सुधारते हैं और तनाव कम करते हैं. द्रिक पंचांग के अनुसार, होली का मुख्य दिन आज है, जहां सुबह से रंग खेलने की परंपरा सबसे पवित्र मानी जाती है. शाम तक उत्सव को संयम से खत्म करना चाहिए.
सुबह का समय होली खेलने के लिए आदर्श होता है. वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा ज्यादा होती है और प्रदूषण कम रहता है. ज्यादातर लोग सुबह 8 बजे से शुरू करते हैं और दोपहर 12 या 1 बजे तक रंग लगाना बंद कर देते हैं. दोपहर बाद ज्यादा देर तक शोर-शराबा या रंग उछालना ठीक नहीं माना जाता. इससे दिन की बाकी खुशी बनी रहती है और शाम को आराम मिलता है.
होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम है. ज्योतिष के अनुसार विभिन्न रंग ग्रहों के प्रभाव को संतुलित करते हैं. यह पर्व मानसिक कड़वाहट दूर कर रिश्तों को मजबूत बनाता है. अगर त्वचा संवेदनशील है तो प्राकृतिक या हल्के रंग चुनें. खुशी से मनाई गई होली आने वाले महीनों तक ऊर्जा और शांति देती है.
होली कामदेव के पुनर्जन्म से जुड़ी है, जिन्हें शिव ने भस्म किया था, लेकिन फाल्गुन पूर्णिमा पर वे जीवित हुए. दूसरी कथा में कृष्ण ने पूतना का वध किया. ब्रज में कृष्ण-राधा की रंग-फूल होली प्रसिद्ध है, जबकि वाराणसी में शिव की भस्म होली होती है. काशी विश्वनाथ मंदिर में विशेष पूजा और अभिषेक का आयोजन होता है.
रंगों से मन प्रसन्न होता है और शरीर पर सकारात्मक असर पड़ता है. लेकिन केमिकल रंगों से बचें, क्योंकि ये त्वचा को नुकसान पहुंचा सकते हैं. प्राकृतिक गुलाल और हर्बल रंग चुनें. उत्सव में शामिल होकर पुरानी कड़वाहट भूलें और नए रिश्ते बनाएं. होली खुशियों का प्रतीक है, जो जीवन को रंगीन बनाती है.
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