पश्चिम बंगाल मतगणना पर TMC को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, केंद्रीय कर्मचारियों की तैनाती पर आ गया फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल विधानसभा मतगणना में केंद्रीय कर्मचारियों की तैनाती को नियमों के अनुरूप बताया है. टीएमसी की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कोई नया आदेश देने से इनकार कर दिया.
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में 4 मई को होने वाली मतगणना को लेकर सियासी घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा था. तृणमूल कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. पार्टी ने हर टेबल पर केंद्र सरकार या पीएसयू कर्मचारियों की अनिवार्य तैनाती का विरोध किया. लेकिन शनिवार को सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी को स्पष्ट झटका देते हुए कहा कि यह व्यवस्था नियमों के खिलाफ नहीं है.
नया आदेश जारी करने से मना
कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कोई नया आदेश जारी करने से मना कर दिया. कोर्ट ने चुनाव आयोग के सर्कुलर को उसके पूरे अर्थ और मर्म के साथ लागू करने का आश्वासन रिकॉर्ड पर लिया. इस फैसले से 294 सदस्यीय विधानसभा की मतगणना की तैयारियां अब और मजबूत हो गई हैं.
कोर्ट ने साफ किया नियम
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि काउंटिंग सुपरवाइजर और असिस्टेंट को केंद्र सरकार के कर्मचारियों में से नियुक्त करना गलत नहीं है. बेंच ने प्रावधान को दोबारा पढ़कर स्पष्ट किया कि नियुक्ति राज्य या केंद्र, किसी भी पूल से की जा सकती है. कोर्ट ने टीएमसी की दलीलों को पर्याप्त नहीं माना और कहा कि नियमों का पालन हो रहा है.
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टीएमसी का रुख नरम, सिब्बल ने उठाए सवाल
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल के जरिए टीएमसी ने चुनाव आयोग की मंशा पर सवाल उठाए. सूचना के अभाव, अतिरिक्त पर्यवेक्षकों की जरूरत और राज्य कर्मचारियों की अनदेखी जैसे मुद्दे उठाए गए. हालांकि सुनवाई के दौरान पार्टी ने अपना रुख कुछ नरम करते हुए कहा कि सर्कुलर के अनुसार हर टेबल पर कम से कम एक राज्य सरकार का कर्मचारी हो.
चुनाव आयोग का आश्वासन
चुनाव आयोग ने कोर्ट को बताया कि जारी सर्कुलर को पूरी भावना से लागू किया जाएगा. 30 अप्रैल के निर्देश के मुताबिक हर टेबल पर सुपरवाइजर या असिस्टेंट में से कम से कम एक केंद्र सरकार या पीएसयू कर्मचारी रहेगा. कोर्ट ने इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर ले लिया, जिससे पारदर्शी मतगणना की उम्मीद बढ़ गई है.
विवाद की जड़ क्या है
चुनाव आयोग के निर्देश के बाद टीएमसी ने आशंका जताई थी कि केंद्र कर्मचारी बीजेपी के प्रभाव में काम कर सकते हैं. कलकत्ता हाई कोर्ट ने पहले ही आयोग के फैसले को सही ठहराया था. अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 4 मई को मतगणना शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न होने की संभावना मजबूत हो गई है.
टीएमसी के लिए अब आगे का रास्ता
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद टीएमसी को अब चुनाव आयोग के सर्कुलर का पालन करना होगा. पार्टी ने कहा है कि वह मतगणना की प्रक्रिया पर नजर रखेगी. पूरे मामले में कोर्ट ने किसी भी तरह का नया हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है, जिससे मतगणना की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं.