नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद भी राजनीतिक हलचल थमने का नाम नहीं ले रही है. टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने साफ कहा है कि वह मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगी क्योंकि उनका मानना है कि वे पराजित नहीं हुई हैं. इस बयान ने सियासी माहौल को और गरमा दिया है. बीजेपी नेताओं ने इसे संविधान के खिलाफ बताते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है. दोनों दलों के बीच आरोप और जवाबी आरोप का दौर लगातार जारी है.
ममता बनर्जी ने स्पष्ट कर दिया है कि वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के पक्ष में नहीं हैं. उनका कहना है कि वे खुद को हारा हुआ नहीं मानतीं. इस बयान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है. विपक्ष इसे लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ बता रहा है, जबकि टीएमसी समर्थक इसे ममता का आत्मविश्वास मान रहे हैं.
बीजेपी प्रवक्ता देबजीत सरकार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में ममता के बयान को असंवैधानिक करार दिया. उन्होंने कहा कि इस तरह की बातें खुद को हास्यास्पद बनाती हैं. उनके मुताबिक, संविधान में विश्वास रखने वाला कोई भी व्यक्ति इस तरह की टिप्पणी नहीं कर सकता. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ममता सिर्फ चर्चा में बने रहने के लिए ऐसे बयान दे रही हैं.
ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री पर साजिश के आरोप लगाए थे. इस पर देबजीत सरकार ने इसे पूरी तरह झूठ बताया. उन्होंने कहा कि यह केवल सुर्खियां बटोरने की कोशिश है. बीजेपी ने साफ किया कि ऐसे आरोपों का कोई आधार नहीं है और यह जनता को गुमराह करने की कोशिश है.
बीजेपी ने आरोप लगाया कि बंगाल में होने वाली हिंसा के पीछे तृणमूल कार्यकर्ता ही होते हैं. देबजीत सरकार के अनुसार, ये लोग बीजेपी कार्यकर्ता बनकर घटनाएं अंजाम देते हैं ताकि पार्टी को बदनाम किया जा सके. उन्होंने कहा कि अगर कहीं भी हिंसा होती है तो प्रशासन को जानकारी दी जाती है और कानून निष्पक्ष तरीके से कार्रवाई करता है.
बीजेपी विधायक सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि संविधान में सब कुछ स्पष्ट है और उन्हें ज्यादा कहने की जरूरत नहीं. वहीं दिलीप घोष ने कहा कि मीडिया में शिकायत करने से कुछ हासिल नहीं होगा. उन्होंने ममता से सवाल किया कि वे आखिर किसकी बात मानती हैं. घोष ने यह भी कहा कि अंततः उन्हें जनता के फैसले को स्वीकार करना होगा.