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India Daily

'टिकट के लिए मांगे 5 करोड़', दिग्गज क्रिकेटर ने TMC से दिया इस्तीफा; कहा- राजनीति में आने का इरादा नहीं था

पूर्व क्रिकेटर मनोज तिवारी ने तृणमूल कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने पार्टी पर टिकट के बदले पांच करोड़ रुपये मांगने का गंभीर आरोप लगाया और संगठन में आंतरिक लोकतंत्र की कमी की बात कही.

KanhaiyaaZee
'टिकट के लिए मांगे 5 करोड़', दिग्गज क्रिकेटर ने TMC से दिया इस्तीफा; कहा- राजनीति में आने का इरादा नहीं था
Courtesy: Social Media

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल चुनाव में टीएमसी की करारी हार के बाद से पार्टी के बुरे दिन शुरू हो गए हैं और एक-एक कर पार्टी के सदस्य पार्टी का साथ छोड़ रहे हैं. इसी कड़ी में अब टीम इंडिया के पूर्व दिग्गज क्रिकेटर और ममता सरकार में खेल राज्य मंत्री रहे मनोज तिवारी ने टीएमसी से अपना नाता तोड़ लिया है. चुनाव परिणामों के ठीक बाद तिवारी का यह बड़ा फैसला पार्टी के लिए एक तगड़ा झटका माना जा रहा है. तिवारी ने न केवल इस्तीफा दिया, बल्कि पार्टी के भीतर चल रहे टिकटों के खेल और शीर्ष नेतृत्व के तानाशाही रवैये पर भी खुलकर अपनी भड़ास निकाली है.

मनोज तिवारी ने एक प्रेस वार्ता के दौरान सनसनीखेज खुलासा किया कि टीएमसी में टिकटों की खुलेआम बोली लगती है. उन्होंने आरोप लगाया कि शिबपुर सीट से दोबारा उम्मीदवार बनने के लिए उनसे पांच करोड़ रुपये की मांग की गई थी. तिवारी के अनुसार, इस बार करीब 70 से 72 उम्मीदवारों ने टिकट पाने के लिए इतनी भारी रकम पार्टी फंड में दी है. पैसे देने से इनकार करने पर ही उन्हें इस बार चुनावी मैदान से बाहर का रास्ता दिखाया गया.

राजनीति में आने का नहीं था इरादा 

क्रिकेटर से नेता बने मनोज ने बताया कि वे कभी सक्रिय राजनीति का हिस्सा नहीं बनना चाहते थे. साल 2019 में जब ममता बनर्जी ने उन्हें लोकसभा चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया, तब वे आईपीएल और रणजी ट्रॉफी में व्यस्त थे और उन्होंने विनम्रता से मना कर दिया था. हालांकि, 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री के व्यक्तिगत संदेश और अरूप विश्वास की मध्यस्थता के बाद उन्होंने कुछ सकारात्मक बदलाव लाने की उम्मीद में राजनीति में कदम रखा था.

नाम मात्र के मंत्री और 'लॉलीपॉप' 

मनोज ने अपनी भूमिका को लेकर कहा कि उन्हें मंत्री पद के नाम पर महज खिलौना थमाया गया था, जिसका कोई वास्तविक अर्थ नहीं था. उनके पास फैसले लेने की शक्ति शून्य थी. वे बताते हैं कि ममता बनर्जी के सामने जब भी जनहित के मुद्दे उठाने का प्रयास किया, उन्हें बीच में ही रोक दिया गया. मुख्यमंत्री का यह कहना कि 'मेरे पास तुम्हारे लिए समय नहीं है', एक निर्वाचित प्रतिनिधि के लिए काफी अपमानजनक था. पार्टी में मंत्रियों की स्थिति दयनीय है.

स्थानीय समस्याओं की अनदेखी का भी लगाया आरोप 

हावड़ा जिले में जलभराव और खराब सीवेज सिस्टम एक बड़ी समस्या रही है. बतौर विधायक, मनोज ने इस मुद्दे पर बार-बार आवाज उठाई और समाधान के लिए अधिकारियों के दरवाजे खटखटाए. लेकिन उनका आरोप है कि हावड़ा नगर पालिका पर लंबे समय से काबिज प्रभावशाली लोगों ने विकास कार्यों में रोड़े अटकाए. चुनाव न होने देना और स्थानीय बुनियादी ढांचे की अनदेखी करना पार्टी की कार्यशैली बन चुकी थी, जिससे क्षेत्र की जनता आज भी नरकीय जीवन जीने को मजबूर है.