भारत में दहेज प्रथा; कानून, आंकड़े और दर्दनाक हकीकत


Reepu Kumari
26 Aug 2025

दहेज की कड़वी सच्चाई

    भारत में दहेज प्रथा अब भी खत्म नहीं हुई है. हर साल हजारों महिलाएं इसकी शिकार बनती हैं और मौत तक पहुंच जाती हैं.

NCRB का चौंकाने वाला खुलासा

    साल 2022 में दहेज हत्या के 6450 मामले दर्ज हुए. इनमें सबसे ज्यादा केस उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्यप्रदेश से सामने आए.

हर दिन 54 महिलाओं की मौत

    आंकड़ों के अनुसार, हर दिन औसतन 54 महिलाएं दहेज प्रताड़ना और हत्या का शिकार होती हैं. यह आंकड़े समाज की हकीकत बताते हैं.

कानून हैं लेकिन न्याय धीमा

    दहेज विरोधी कानून मौजूद हैं, लेकिन लंबी मुकदमेबाजी और जांच प्रक्रिया अक्सर आरोपियों को बचा लेती है.

दहेज प्रथा की जड़ें

    पहले दहेज बेटियों को शादी के बाद आर्थिक सुरक्षा देने का तरीका था. लेकिन धीरे-धीरे यह लालच और अपराध में बदल गया.

दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1961

    1 जुलाई 1961 से यह कानून लागू हुआ, जिसके तहत दहेज लेना और देना दोनों दंडनीय अपराध घोषित किए गए.

IPC की सख्त धाराएं

    IPC की धारा 304B दहेज हत्या से जुड़ी है, जबकि धारा 498A पति या परिवार द्वारा की गई क्रूरता को अपराध मानती है.

घरेलू हिंसा कानून 2005

    महिलाओं को सुरक्षा देने के लिए 2005 में ‘घरेलू हिंसा से संरक्षण अधिनियम’ लागू किया गया. यह दहेज उत्पीड़न से जुड़े मामलों में मददगार है.

कानून बदलने की जरूरत

    कानून सख्त हैं, लेकिन समाज की सोच नहीं बदली. दहेज प्रथा रोकने के लिए जागरूकता और शिक्षा सबसे अहम हथियार हैं.

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