दुनिया की पहली बिना हाथ-पैर वाली तीरंदाज ने जीता गोल्ड, आनंद मंहिद्रा बोले- 'जब भी कमजोर महसूस करता हूं...'
ओडिशा की पायल नाग ने दुनिया की पहली बिना हाथ पैर वाली तीरंदाज बनकर इतिहास रचा दिया और बैंकॉक में गोल्ड जीता, उनकी कहानी ने उद्योगपति आनंद महिंद्रा समेत देशभर को प्रेरित किया है.
कभी जिंदगी ने जिनके सामने अंधेरा खड़ा कर दिया था, आज वही पायल नाग उम्मीद की नई रोशनी बन गई हैं. ओडिशा के बलांगीर जिले से आने वाली इस युवा खिलाड़ी ने दुनिया की पहली बिना हाथ पैर वाली तीरंदाज बनकर इतिहास रचा है. बैंकॉक में आयोजित वर्ल्ड पैरा आर्चरी सीरीज में गोल्ड जीतकर उन्होंने न सिर्फ भारत का नाम रोशन किया, बल्कि लाखों लोगों को यह भरोसा भी दिया कि हौसला हर मुश्किल से बड़ा होता है.
संघर्ष से बनी पहचान
पायल नाग का बचपन आसान नहीं था. मजदूर परिवार में जन्मी पायल की जिंदगी आठ साल की उम्र में एक हादसे ने बदल दी, जब करंट लगने से उन्होंने अपने चारों अंग खो दिए. यह घटना किसी भी इंसान को तोड़ सकती थी, लेकिन पायल ने हार नहीं मानी. मुश्किल हालात में भी उन्होंने जीने की जिद बनाए रखी और धीरे धीरे अपने अंदर नई ताकत पैदा की.
कोच ने निभाई अहम भूमिका
पायल की जिंदगी में असली मोड़ 2023 में आया, जब कोच कुलदीप वेदवान की नजर उन पर पड़ी. उन्होंने सोशल मीडिया पर पायल की पेंटिंग देखी और उनकी प्रतिभा को पहचाना. इसके बाद उन्होंने पायल को पैरा आर्चरी की ट्रेनिंग देना शुरू किया. वेदवान वही कोच हैं जिन्होंने वर्ल्ड चैंपियन शीतल देवी को भी तैयार किया है. उनके मार्गदर्शन ने पायल को नई दिशा दी.
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खास तकनीक से मिली उड़ान
पायल के लिए सामान्य उपकरणों से खेलना संभव नहीं था. इसलिए उनके लिए खास तरह का धनुष और सपोर्ट सिस्टम तैयार किया गया. प्रोस्थेटिक पैरों, स्टील सपोर्ट और चेस्ट रिलीज सिस्टम के जरिए वह तीर चलाती हैं. तीर लगाने में उन्हें मदद लेनी पड़ती है, लेकिन निशाना खुद साधती हैं. इस तकनीक को परफेक्ट करने में करीब तीन महीने लगे, जिसके बाद पायल ने तेजी से प्रगति की.
बैंकॉक में ऐतिहासिक जीत
पायल नाग ने बैंकॉक में वर्ल्ड पैरा आर्चरी सीरीज फाइनल में गोल्ड जीतकर इतिहास रच दिया. खास बात यह रही कि उन्होंने फाइनल में अपनी ही आदर्श खिलाड़ी शीतल देवी को हराया. यह जीत उनके आत्मविश्वास और मेहनत का नतीजा है. अपने पहले ही इंटरनेशनल मुकाबले में गोल्ड जीतना किसी भी खिलाड़ी के लिए बड़ी उपलब्धि होती है, और पायल ने इसे सच कर दिखाया.
महिंद्रा ने पायल को बताया असली हीरो
उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने पायल की कहानी को सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए उन्हें असली हीरो बताया. उन्होंने लिखा कि जब भी वह खुद को कमजोर महसूस करते हैं, तो पायल और शीतल जैसी कहानियां उन्हें नई ऊर्जा देती हैं. उनके मुताबिक, ये खिलाड़ी सिर्फ सोमवार की मोटिवेशन नहीं, बल्कि हर दिन प्रेरणा देने वाली मिसाल हैं. पायल अब देश के लिए और कई मेडल जीतने की तैयारी में हैं.