AI सीखेगा बाल काटना? हेयर ड्रेसर की नौकरी पर मंडराया खतरा!
AI के बढ़ते इस्तेमाल ने व्हाइट कॉलर नौकरियों के साथ अब ब्लू कॉलर कामों को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है. हर्ष गोयनका के वायरल वीडियो ने हेयर ड्रेसर के काम में AI की संभावनाओं पर नई बहस छेड़ दी है.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का असर अब सिर्फ कंप्यूटर और ऑफिस के कामों तक सीमित नहीं रह गया है. सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने इस बहस को और दिलचस्प बना दिया है. इन दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो बहुत तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें एक हेयर ड्रेसर काम करता दिख रहा है, जबकि तकनीक उसके हाथों की गतिविधियों और काम करने के तरीके को रिकॉर्ड करती नजर आती है. इसके बाद सवाल उठने लगा कि क्या AI भविष्य में ऐसे काम भी सीख सकता है. और न केवल सीखना बल्कि क्या वह भविष्य में हेयर ड्रेसर की जगह ले सकता है
हेयर ड्रेसर के काम को AI कैसे सीख सकता है?
हेयरकट करना देखने में आसान लग सकता है, लेकिन इसमें लगातार कई फैसले लेने पड़ते हैं. ग्राहक के चेहरे, बालों की लंबाई, पसंद और स्टाइल के मुताबिक हाथों की गति बदलती है. कैमरे और सेंसर किसी विशेषज्ञ की गतिविधियों को रिकॉर्ड कर सकते हैं. इसी डेटा से मशीन को किसी प्रक्रिया की जानकारी देने की कोशिश की जा सकती है. वायरल वीडियो इसी तकनीकी प्रयोग की तरफ इशारा करता है.
अब फिजिकल जॉब पर भी AI की नजर
अब तक ऑटोमेशन की चर्चा मुख्य रूप से फैक्ट्री और दोहराए जाने वाले कामों तक सीमित थी. जेनरेटिव AI ने लेखन, कोडिंग, डिजाइन और कस्टमर सपोर्ट जैसे क्षेत्रों को भी प्रभावित किया. वहीं रोबोटिक्स और कंप्यूटर विजन में विकास के साथ शारीरिक कामों पर भी चर्चा शुरू हो गई है. हालांकि इंसान की तरह सटीक हाथों का इस्तेमाल करना मशीनों के लिए अभी भी बड़ी चुनौती है.
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क्या खत्म हो जाएगी हेयर ड्रेसर की नौकरी?
सिर्फ एक वीडियो के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि हेयर ड्रेसर की नौकरियां जल्द मशीनों के पास चली जाएंगी. हर ग्राहक के बाल, पसंद और जरूरत अलग होती है. मौके के हिसाब से फैसला लेना इस काम का अहम हिस्सा है. इसके अलावा ग्राहक और हेयर ड्रेसर के बीच बातचीत और भरोसा भी जरूरी होता है. इसलिए फिलहाल AI को विकल्प से ज्यादा सहायक तकनीक के रूप में देखना उचित होगा.
वायरल वीडियो ने छेड़ी बड़ी बहस
हर्ष गोयनका ने वीडियो साझा करते हुए AI ट्रेनिंग और हेयर ड्रेसर की नौकरी को लेकर सवाल उठाया. इसका सबसे बड़ा संदेश यह है कि तकनीक अब केवल स्क्रीन पर होने वाले कामों तक सीमित नहीं है. भविष्य में AI इंसानों के काम करने के तरीकों से सीखकर कई प्रक्रियाओं में मदद कर सकता है. इसलिए असली सवाल नौकरी खत्म होने से ज्यादा यह है कि इंसान और AI साथ मिलकर कितने काम कर पाएंगे.